आगरा कॉलेज प्राचार्य पद पर खींचतान की शुरुआत दो साल पहले साल 2023 में हुई थी। तब तत्कालीन प्राचार्य प्रो. अनुराग शुक्ल के खिलाफ आगरा कॉलेज के शिक्षकों ने लगातार 23 दिन तक आंदोलन किया था।
शासन के आदेश पर तब प्रो. सीके गौतम ने ही डॉ. शुक्ला की नियुक्ति में लगाए गए दस्तावेज और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। यही जांच डॉ. शुक्ला की बर्खास्तगी की वजह बनी थी।
आगरा कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य प्रो. अनुराग शुक्ला के खिलाफ कॉलेज के शिक्षकों का गुस्सा 2023 में तब फूटा जब उन्होंने शिक्षकों के 104 साल पुराने संगठन स्टाफ क्लब के चुनाव में हारे हुए संगठन को मान्यता देते हुए समानांतर क्लब के गठन को मंजूरी दी।
इसके बाद परीक्षा में रोटेशन लागू न करना और करीब 17 लाख रुपये एडवांस लेने के बाद भी शिक्षकों को परीक्षा का भुगतान न करने के विरोध में शिक्षकों ने आंदोलन छेड़ दिया। शिक्षकों की शिकायत के बाद शासन ने प्रो. शुक्ला को निलंबित कर दिया और कार्यवाहक प्राचार्य पद की जिम्मेदारी प्रो. सीके गौतम पर आ गई।
प्रो. सीके गौतम की रिपोर्ट पर ही शासन ने निदेशक उच्च शिक्षा एवं अतिरिक्त निदेशक शिक्षा समेत चार सदस्यीय टीम को जांच के लिए आगरा भेजा, जिसमें रिपोर्ट सही पाई गई। बाद में यही जांच उनकी सेवा समाप्ति का कारण बनी। बर्खास्तगी के बाद से प्रो. अनुराग शुक्ला, वर्तमान प्राचार्य प्रो. सीके गौतम के खिलाफ मोर्चा खोले हैं।


