शिक्षक दिवस के मौके पर बृहस्पतिवार को अमर उजाला कार्यालय में शिक्षकों के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बच्चों के बदलते व्यवहार में शिक्षकों की भूमिका में शिक्षकों ने अपनी राय रखने के साथ उपयोगी सुझाव भी दिए।
शिक्षकों ने कहा, अब बच्चों को पहले की तरह प्रेम नहीं मिल रहा है। अपनी सहुलियत के अनुसार ही माता-पिता भी बच्चों को प्यार देते है। इसके चलते स्कूल में केवल शिक्षक का ही नहीं बल्कि माता-पिता, दादा-दादी का रूप भी बच्चों को मिल रहा है। यदि शिक्षकों को तोहफा देना चाहते है, तो अपने बच्चों को समय दें। इससे बेहतर शिक्षक के लिए कोई तोहफा नहीं हो सकता।
शिक्षक भी बच्चों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, उसका असर पड़ता है। समाज में बदलती पीढ़ी के हम ही जिम्मेदार हैं। शिक्षा में अब गुरुकुल का समय आ गया है। शिक्षकों की उपमा शिल्पकार से की जाती है, किस तरह अब तकनीक बदल गई है पर शिल्पकार आज भी वहीं हैं, वो अपनी तरह से अपनी रचना को आकार दे सकता है।
– विकास एंथोनी, प्रधानाचार्य, ख्रिस्त ज्योति एकेडमी
सिर्फ बच्चे ही नहीं शिक्षक भी बच्चों से बहुत कुछ सीखते है। बच्चों में सीखने के लिए भाषा कभी बाधा नहीं बनती। हमारी कमी है कि हम बच्चों को भाषा का ज्ञान नहीं देते। आजकल स्कूल सिर्फ फिलिंग स्टेशन बनकर रह गए हैं। बच्चों में पढ़ाई का बोझ है और उनकी पढ़ने की रुचि घट रही है। बच्चों की रुचि को पकड़ना शिक्षक के लिए जरूरी है। अनुशासन के लिए बच्चों की भावनाओं को बिना ठेस पहुंचाए समझाना चाहिए।
– देवेश जोशी, शिक्षक


