Ins Aravali Commission And Future Threats Navy Chief Admiral Tripathi Reply Refers To Maritime Challenges – Amar Ujala Hindi News Live


नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने शुक्रवार को कहा कि तेजी से बदलते और जटिल समुद्री माहौल में, जहां खतरे अचानक और कई बार अदृश्य रूप से सामने आते हैं, ऐसे समय में जानकारी को तुरंत इकट्ठा करना, उसका विश्लेषण करना और साझा करना ही असली ‘रोकथाम और रक्षा’ तय करेगा। वे गुरुग्राम में नौसेना के नए बेस आईएनएस अरावली के जलावतरण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘भविष्य के खतरों का सामना केवल आज के सहयोग से ही किया जा सकता है।’

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अरावली पर्वत श्रृंखला से प्रेरित नाम वाला यह नया बेस, भारतीय नौसेना की सूचना और संचार व्यवस्था को मजबूत करेगा। यह देश और नौसेना कमान, नियंत्रण और समुद्री डोमेन जागरूकता (एमडीए) ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है।

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नौसेना प्रमुख त्रिपाठी ने कहा कि 1949 से शुरू हुआ यह परिसर पिछले 15 वर्षों में बेहद विकसित हुआ है। 2014 में सूचना प्रबंधन एवं विश्लेषण केंद्र (आईएमएसी) और 2018 में सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) की स्थापना के बाद, यह परिसर अब देश और दुनिया के लिए समुद्री जानकारी साझा करने का अहम केंद्र बन चुका है।

उन्होंने कहा, ‘भविष्य में सूचना ही समुद्री ताकत की असली पूंजी होगी। जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हमारे समुद्री हित भी कई गुना बढ़ेंगे- चाहे वह व्यापार हो, ऊर्जा हो या कनेक्टिविटी। इन हितों की रक्षा के लिए हमारा सूचना तंत्र आविष्कार, नवाचार और एकीकरण की त्रिमूर्ति से संचालित होना चाहिए।’

नौसेना प्रमुख ने बताया कि आईएनएस अरावली सिर्फ एक प्रौद्योगिकी केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि सहयोग का भी केंद्र बनेगा, जो नौसेनिक फ्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को जोड़ेगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘महासागर’ यानी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति का एक सच्चा प्रतीक है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, ‘आज, हम एक नेटवर्क-केंद्रित और ज्ञान संचालित बल के रूप में भारतीय नौसेना के विकास में एक नया अध्याय लिख रहे हैं।’

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नौसेना प्रमुख ने कहा कि ‘समुद्रिका सुरक्षा सहयोगम्’ या ‘सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा’ के आदर्श वाक्य से प्रेरित, यह नौसैनिक अड्डा सहायक और सहयोगी लोकाचार का उदाहरण है, जो नौसेना इकाइयों, एमडीए केंद्रों और संबद्ध हितधारकों के साथ निर्बाध रूप से काम करता है। उन्होंने कहा, ‘जैसे अरावली पर्वत श्रृंखला सदियों से अडिग खड़ी है, वैसे ही आईएनएस अरावली भी हमारे समुद्री हितों की रक्षा और साझेदारी को मजबूत करने में लगातार डटा रहेगा-कभी भी, कहीं भी, किसी भी तरह।’



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