‘बैंक में जमा हर पैसा टैक्स योग्य इनकम नहीं…’, ITAT ने पकड़ी आयकर विभाग की गलती, सुनाया बड़ा फैसला – itat order income tax assessment section 44ad bank deposits
Income Tax Notice: सूरत के फल कारोबारी ने 14.57 लाख रुपये आय घोषित की, लेकिन टैक्स विभाग ने बैंक जमा के आधार पर 5.09 करोड़ रुपये का आकलन किया। ITAT ने अधिकारी के आंकड़ों में गड़बड़ी पाई और मामला दोबारा जांच के लिए भेज दिया।
आईटीएटी ने सुनाया बड़ा फैसला।
नई दिल्ली: सूरत के एक फल कारोबारी ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में अपनी आय सिर्फ 14.57 लाख रुपये बताई थी, लेकिन टैक्स विभाग ने बैंक खातों में जमा रकम के आधार पर उसकी आय करीब 5.09 करोड़ रुपये मान ली। यानी घोषित आय से 34 गुना से भी ज्यादा का आकलन किया गया। मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) सूरत बेंच पहुंचा तो ट्रिब्यूनल ने टैक्स अधिकारी के आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी।
जजों ने पाया कि टैक्स अधिकारी (एसेसिंग ऑफिसर- AO) द्वारा तैयार किए गए कैश डिपॉजिट के आंकड़े पूरी तरह से गलत थे और बैंक रिकॉर्ड से मेल ही नहीं खा रहे थे। कारोबारी ने इनकम टैक्स की धारा 44AD के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का लाभ लिया था। उन्होंने नियमित बही-खाते भी नहीं रखे थे।
यह मामला सूरत के फल व्यापारी जाकिर याकूबभाई पटेल का है।
व्यापारी ने धारा 44AD के तहत अपना रिटर्न भरा और 14.57 लाख रुपये की व्यावसायिक आय घोषित की। इस योजना के तहत नियमित बही-खाते रखना अनिवार्य नहीं होता।
नोटबंदी के दौरान बैंक खाते में हुए कैश डिपॉजिट के आधार पर आयकर विभाग ने उनके केस को स्क्रूटनी में डाल दिया।
टैक्स अधिकारी ने करीब 2.43 करोड़ रुपये बैंक डिपॉजिट और क्रेडिट, 71.87 लाख रुपये अनसिक्योर्ड लोन और करीब 1.79 करोड़ रुपये लोन व एडवांस के रूप में जोड़ दिए।
इसके बाद कारोबारी की कुल आकलित आय करीब 5.09 करोड़ रुपये हो गई, जबकि रिटर्न में आय सिर्फ 14.57 लाख रुपये घोषित की गई थी।
ITAT का फैसला
आईटीएटी के समक्ष करदाता ने दलील दी कि अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए आंकड़े गलत थे। उनके बैंक खाते में वास्तविक कैश डिपॉजिट 2.43 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि केवल 89.16 लाख रुपये था। इसके अलावा, अनसिक्योर्ड लोन पुराने सालों के थे। ITAT ने माना कि आयकर अधिकारी के आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी थी। केवल इसलिए कि किसी करदाता ने धारा 44AD चुनी है, बैंक खाते में जमा हर राशि को बिना स्रोत और प्रकृति जांचे सीधे ‘कर योग्य आय‘ नहीं माना जा सकता। ट्रिब्यूनल ने इस असेसमेंट को रद्द करने के बजाय मामले को फिर से सही सत्यापन के लिए टैक्स अधिकारी के पास भेज दिया है।
लेखक के बारे मेंराजेश भारतीराजेश भारती, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। वह जुलाई 2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। राजेश भारती NBT डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं। वह कमोडिटी मार्केट, शेयर मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, क्रिप्टोकरेंसी पर मजबूत पकड़ रखते हैं। 16 साल से अधिक के पत्रकारिता करियर में सिटी रिपोर्टिंग, हेल्थ रिपोर्टिंग, बिजनेस-इन्वेस्टर समिट आदि कवर किए हैं।
राजेश भारती प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ डेस्क पर भी अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। राजेश भारती को प्रिंट मीडिया में काम करने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह न केवल अपनी लेखनी, बल्कि वीडियो के माध्यम से भी नवभारत टाइम्स के चाहने वालों तक पहुंच रखते हैं। सोना-चांदी की कीमतों को लेकर नवभारत टाइम्स के लिए कमोडिटी एक्सपर्ट के रूप में भूमिका निभाते हैं। उनका काम केवल न्यूज ब्रेक या किसी न्यूज को कवर करना ही नहीं, बल्कि रिसर्च के माध्यम से उनमें नई जानकारी देना भी है।
पत्रकारिता अनुभव
राजेश भारती का पत्रकारिता करियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक भास्कर, भोपाल में अगस्त 2009 में शुरू हुआ। भोपाल के बाद वह दैनिक भास्कर में ही उप-संपादक के रूप में इंदौर में दिसंबर 2011 तक रहे। इसके बाद वह इंदौर में ही दिसंबर 2011 से दिसंबर 2013 तक दबंग दुनिया अखबार में इंटरनेशनल डेस्क पर रहे। इंदौर में पत्रकारिता के दौरान राजेश भारती ने साल 2012 में ‘मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के लिए विशेष रिपोर्टिंग की। दिसंबर 2013 से राजेश भारती ने दैनिक भास्कर डिजिटल (DB Digital) के साथ नई पारी शुरू की। बाद में वह फिर से प्रिंट पत्रकारिता में लौटे और औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में लोकमत अखबार से नई पारी शुरू की।
साल 2017 में वह फिर से दैनिक भास्कर (दिल्ली) के साथ जुड़े और वहां सिटी रिपोर्टिंग के साथ डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाली। करीब एक साल बाद टाइम्स ग्रुप के साथ शुरुआत की। 2018 में संडे नवभारत टाइम्स का हिस्सा बने। वहां पर्सनल फाइनेंस, इनकम टैक्स, हेल्थ, टेक एंड गैजेट्स, एजुकेशन आदि विषयों पर रिसर्च बेस्ड स्टोरी कीं। इस दौरान देश के कई बड़े-बड़े एक्सपर्ट से बातें कीं और उनके व्यू स्टोरी में रखे, जिससे स्टोरी में नयापन आया। अब वह जुलाई 2024 से नवभारत टाइम्स, डिजिटल का हिस्सा हैं।
राजेश भारती ने एनआरईसी कॉलेज (चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी), खुर्जा से साइंस (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया।
अवॉर्ड/अचीवमेंट्स
बेस्ट रिपोर्टिंग अवॉर्ड: साल 2012 में ‘मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के लिए।… और पढ़ें