छत्रपति संभाजीनगर10 घंटे पहलेलेखक: शेख अनवर
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अभिजीत दीपके बोले कि लोकतंत्र को सिर्फ पार्टी और चुनाव तक सीमित न रखकर जनता की भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके कुछ महीनों से अपने आंदोलनों को लेकर चर्चा में हैं।
जंतर-मंतर पर आंदोलन के बाद इन दिनों दीपके सीजेपी के भविष्य, कोर कमेटी और आगे के आंदोलनों की रूपरेखा बनाने में जुटे हैं।
भविष्य की योजनाओं और उन पर उठ रहे सवालों को लेकर ‘दैनिक भास्कर’ से विशेष बातचीत में दीपके ने साफ किया कि फिलहाल CJP को राजनीतिक पार्टी नहीं बनाया जाएगा।
उन्होंने सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ कार्यक्रम शुरू करने की भी बात कही। दीपके से बातचीत के प्रमुख अंश…
सवाल: सीजेपी को राजनीतिक पार्टी बनाने पर चर्चा हुई?

जवाब: हां, कोर कमेटी में चर्चा हुई। लेकिन अभी राजनीति में उतरना जल्दबाजी होगी। देश में बड़ी-बड़ी पार्टियां खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। लोकतंत्र केवल पार्टियों और चुनाव तक सीमित नहीं है। इसमें जनता, प्रेशर ग्रुप, सिविल सोसायटी, मीडिया और न्यायपालिका की भी भूमिका है।
सवाल: क्या किसी राजनीतिक पार्टी ने जुड़ने का प्रस्ताव दिया?
जवाब: नहीं। अलग-अलग पार्टियों के लोग आंदोलन की सफलता पर शुभकामनाएं देने आए हैं। मैं इसकी इज्जत करता हूं कि उन्होंने आंदोलन को स्वतंत्र रखने की बात समझी।
सवाल: कांग्रेस से कौन मिला? क्या राहुल गांधी से मुलाकात होगी?
जवाब: पवन खेड़ा मिले थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें कांग्रेस और राहुल गांधी ने भेजा है और वे आंदोलन के मुद्दे के साथ हैं।
राहुल गांधी से मेरी बात नहीं हुई है। अगर मिलने का मौका मिला तो जरूर मिलेंगे। भाजपा के लोग मिलना चाहें तो उनसे भी मिलने के लिए तैयार हैं।
सवाल: आपको ‘केजरीवाल पार्ट-2’ कहा जा रहा है?

जवाब: कुछ लोग मुझे आम आदमी पार्टी से जोड़ते हैं और कुछ आरएसएस-भाजपा से। मैं उनसे इतना ही कहूंगा कि पहले आपस में तय कर लें कि हमें किसकी बी-टीम कहना है।
सवाल: कोर कमेटी में दोस्तों को पद देने के आरोप हैं?
जवाब: कोर कमेटी में ऐसे लोगों को लिया गया है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में काम किया है। कोई लीगल जर्नलिज्म में काम कर चुका है, कोई पेपर लीक के मुद्दे पर, कोई पॉलिसी और बजट पर और कोई किसान आंदोलन में।
इनमें से कई लोगों को मैं पहले जानता भी नहीं था। दोस्तों को लेना होता तो स्कूल और बचपन के दोस्तों को ले सकता था।
सवाल: आप पर आरोप है कि अहंकारी हो गए हैं?
जवाब: ऐसा नहीं है। जो लोग मेरे खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, उनसे बातचीत हुई। हमारी टीम के सदस्य उनके साथ दो-तीन घंटे बैठे। उनकी मांग थी कि उन्हें कोर टीम में शामिल किया जाए, लेकिन हर व्यक्ति को इसमें शामिल नहीं कर सकते।
संगठन का विस्तार होगा तो दूसरे लोगों को भी जिम्मेदारियों में शामिल किया जा सकता है। किसी को जबरदस्ती या दबाव में कोर टीम में शामिल नहीं किया जा सकता।
सवाल: चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम पर क्या कहना है?

जवाब: मुझे लगता है कि 2024 के आम चुनाव के बाद वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जा रही है। पहले वोटर सरकार चुनता था, अब सरकार चुन रही है कि वोटर कौन होगा।
बंगाल में 27 लाख जेन्युइन वोटर्स का मामला सामने आया, जो कोर्ट भी गए। वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसलिए मुझे लगता है कि समस्या सिर्फ ईवीएम नहीं है, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी भी लोकतंत्र को कमजोर करेगी।
सवाल: मौजूदा पार्टियों और व्यवस्था पर भरोसा क्यों कम हुआ?
जवाब: वोटर किसी विचारधारा और पार्टी को वोट देता है, लेकिन बाद में निर्वाचित प्रतिनिधि दूसरी पार्टी में चला जाता है। सरकार किसी की चुनी जाती है और जोड़तोड़ के बाद स्थिति बदल जाती है।
इससे जनता के भरोसे को नुकसान होता है। हमें लगता है कि लोकतंत्र को सिर्फ पार्टी और चुनाव तक सीमित न रखकर जनता की भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
सवाल: सितंबर से देशभर में जाने की योजना क्या है?
जवाब: सितंबर से हम ‘क्या बोलती पब्लिक’ कार्यक्रम शुरू करेंगे। अलग-अलग राज्यों में जाएंगे। वहां लोगों की समस्याएं और उनकी अपेक्षाएं सुनेंगे। इन बातचीत से जो बातें निकलकर आएंगी, उनके आधार पर एक मॉडल एजेंडा तैयार करेंगे।
सवाल: धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति को कैसे देखते हैं?

जवाब: देश की राजनीति का फोकस और राजनीतिक विमर्श बदलना चाहिए। चुनाव में धर्म से जुड़ी बयानबाजी के बजाय सवाल यह होना चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था कैसे बेहतर होगी, नौकरी कैसे मिलेगी, स्वास्थ्य सुविधाएं और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे सुधरेगा।
यह बताना चाहिए कि आगे क्या करेंगे। एआई से नौकरियों पर असर पड़ेगा, लेकिन उससे नए अवसर भी पैदा होंगे।
सवाल: भारत में ही रहेंगे या वापस अमेरिका जाएंगे?
जवाब: भारत में ही रहूंगा। फुल टाइम यहीं काम करूंगा और पूरा समय सीजेपी को दूंगा।
सवाल: देश में जेन-जी की भूमिका को किस तरह देखते हैं?
जवाब: इस आंदोलन की सबसे बड़ी जीत किसी का इस्तीफा नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि युवाओं ने अपने अंदर का डर खत्म करके सरकार से सवाल किया और जवाबदेही मांगी।
लोकतंत्र में किसी को भी सरकार से सवाल करने या अपनी बात रखने से डरना नहीं चाहिए।

तस्वीर 6 जून की है, कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। समर्थकों ने अभिजीत दीपके को कंधे पर बिठाया।
सवाल: युवाओं और समर्थकों को क्या संदेश है?
जवाब: सबसे पहले सभी का शुक्रिया। लोगों के समर्थन के बिना आंदोलन सफल नहीं होता। लेकिन मेरी एक बात साफ है – रातों-रात किसी को हीरो मत बनाइए।
लोकतंत्र में किसी एक व्यक्ति को देश, संविधान और संस्थाओं से बड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए।
सवाल: सरकार अपने वादों से पीछे हटती है तो अगला कदम क्या होगा?
जवाब: हमें फिर आंदोलन करना पड़ेगा। सरकारों को यह नहीं समझना चाहिए कि छात्रों और युवाओं का गुस्सा खत्म हो गया है। समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे फिर सड़कों पर उतरेंगे।
सवाल: क्या 16 साल की उम्र से वोटिंग का अधिकार आपके एजेंडे में है?
जवाब: फिलहाल ऐसा कोई एजेंडा नहीं है। अभी हम इस पर विचार नहीं कर रहे हैं।
सवाल: भारत की विदेश नीति को कैसे देखते हैं?

जवाब: जब अमेरिका के साथ ट्रेड और टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही थी, तब मैं अमेरिका में था।
मेरा मानना है कि अमेरिका अपने फायदे के लिए भारत पर दबाव बना रहा था। रूस से तेल खरीदने को लेकर भी भारत पर दबाव था।
सवाल: आपने मीडिया पर भी सवाल उठाए हैं?
जवाब: अधिकांश मीडिया संस्थानों ने अपने-अपने प्रोपेगंडा तय कर रखे हैं। लेकिन ‘दैनिक भास्कर’ की निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए हमारे दिल में विशेष स्थान है। ‘भास्कर’ की निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए मैं दिल से आभार मानता हूं।
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