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असम में हिंसा

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इमेज कैप्शन, कार्बी आंगलोंग भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत गठित एक स्वायत्त क्षेत्र है

असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग ज़िले में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सोमवार को कथित तौर पर ज़िले के एक शीर्ष बीजेपी नेता के घर में आग लगा दी.

यह घटना खेरोनी थाना क्षेत्र की है. यहां बीजेपी के नेतृत्व वाली कार्बी आंगलोंग स्वायत्तशासी परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलिराम रोंगहांग का घर है.

दरअसल, भीड़ ने कथित तौर पर रोंगहांग के घर पर आग उस समय लगाई जब प्रदर्शनकारियों और उनके बीच एक बैठक होने वाली थी.

आगज़नी की घटना के समय बीजेपी नेता के परिवार का कोई भी सदस्य घर पर मौजूद नहीं था.

ज़िला प्रशासन ने इलाक़े में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लगा दी है. इसके साथ ही राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को प्रभावित क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भेजा गया है.

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इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने भूख हड़ताल पर बैठे उनके कुछ लोगों को जबरन हटाया

क्यों हुई हिंसा?

6 दिसंबर से खेरोनी थाने के अंतर्गत फेलांगपी में स्थानीय आदिवासी भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे.

ये लोग मुख्य रूप से क्षेत्र में सरकारी तौर पर तय चरागाह आरक्षित भूमि और विलेज ग्रेजिंग रिज़र्व की ज़मीन से कथित अवैध बसावटों को हटाने की मांग कर रहे हैं.

कार्बी आंगलोंग भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत गठित एक स्वायत्त क्षेत्र है और विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि आरक्षित ज़मीन पर अन्य राज्यों से आए ‘बाहरी लोगों’ ने कब्ज़ा कर रखा है.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सोमवार सुबह पुलिस ने भूख हड़ताल पर बैठे उनके कुछ लोगों को जबरन हटाया. इसके बाद सैकड़ों की तादाद में जमा हुए प्रदर्शनकारियों ने सड़क के पास पुल पर बैठकर नारेबाज़ी की.

इस बीच इलाक़े में तनाव बढ़ने से भीड़ में शामिल प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर बीजेपी नेता और आदिवासी परिषद के चीफ़ रोंगहांग के घर में आग लगा दी.

पुलिस ने हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले बल का प्रयोग किया, बाद में हवाई फायरिंग की.

इस घटना में कम से कम 22 लोग घायल हुए, जिनमें 20 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को फ़ायरिंग करनी पड़ी, जिसमें दो प्रदर्शनकारियों के पैरों में गोली लगी है.

खेरोनी के नेपाली बस्ती और आसपास के इलाक़ों में व्यापक तोड़फोड़ की ख़बरें सामने आई हैं.

क्षेत्र के एक स्थानीय पत्रकार सुशांत राय ने बताया, “कुछ प्रदर्शनकारियों ने निजी घरों और दुकानों को नुक़सान पहुंचाया है और कई वाहनों में तोड़फोड़ की है.”

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इमेज कैप्शन, पुलिस ने हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल का इस्तेमाल किया और फ़ायरिंग की

बीजेपी नेता और सीएम सरमा ने क्या कहा?

इस घटना के बाद पत्रकारों से बात करते हुए तुलिराम रोंगहांग ने पूरे मामले को ग़लतफ़हमी का नतीजा बताया.

उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारियों के साथ शाम 4 बजे एक बैठक तय की गई थी. भूख हड़ताल करने वालों में से कुछ को बिगड़ती सेहत की वजह से इलाज के लिए गुवाहाटी ले जाया गया, लेकिन दूसरों ने सोचा कि उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है. जिसके कारण स्थिति इस तरह उत्पन्न हो गई.”

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू को इलाक़े में भेजा गया है.

सीएम सरमा ने कहा, “ग़ैर-कार्बी लोगों को हटाने पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है. हम कोर्ट के आदेशों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते और मैंने इस मामले में ख़ुद प्रदर्शनकारियों से मिलने का वादा किया है. मुझे विश्वास है कि हम बातचीत से कोई समाधान निकाल सकते हैं.”

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इमेज कैप्शन, प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि आरक्षित ज़मीन पर अन्य राज्यों से आए ‘बाहरी लोगों’ ने कब्ज़ा कर रखा है



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