Omkareshwar Mandir Dispute: ओंकारेश्वर में मंदिर कर्मचारियों और हरियाणा से आए श्रद्धालुओं में मारपीट हुई है। मंदिर के कर्मचारी श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे लेकर टूट पड़े हैं। हालांकि किसी पक्ष ने इसे लेकर शिकायत दर्ज नहीं करवाई है।

झूला पुल से प्रवेश को लेकर भड़का विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, मार खाने वाले श्रद्धालु हरियाणा के रहने वाले थे, जो अपने एक दल के साथ ओंकारेश्वर दर्शन के लिए पहुंचे थे। विवाद उस समय शुरू हुआ जब ये श्रद्धालु मंदिर के झूला पुल क्षेत्र से दर्शन के लिए प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान वहां तैनात मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया। बताया जा रहा है कि रोके जाने से नाराज हरियाणा के श्रद्धालुओं के दल में से किसी सदस्य ने मंदिर कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज कर दी।
जमकर हुई मारपीट
गाली-गलौज की बात सुनते ही मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी अपना आपा खो बैठे। बातचीत से शुरू हुआ यह विवाद कुछ ही पलों में हिंसक झड़प में बदल गया। ओंकारेश्वर मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर लाठी-डंडे निकाल लिए और श्रद्धालुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह आस्था के केंद्र में लात-घूंसे और डंडे चल रहे हैं।
बैकफुट पर मंदिर प्रबंधन
इस पूरी घटना का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और चौतरफा फजीहत शुरू हुई, तब जाकर मंदिर प्रबंधन की ओर से एक बयान सामने आया है। प्रबंधन ने अपनी सफाई में कहा कि मंदिर की दर्शन व्यवस्था को किसी भी कीमत पर गड़बड़ नहीं होने दिया जाएगा। उनके मुताबिक, श्रद्धालु नियम तोड़कर जबरदस्ती दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे।
अभी तक इस घटना को लेकर किसी भी पक्ष (श्रद्धालु या मंदिर ट्रस्ट) ने थाने आकर औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
जगदीश सिंधिया, मानधाता थाना प्रभारी
सरेआम मारपीट बर्दाश्त नहीं
पुलिस ने कहा कि शिकायत न मिलने के बावजूद, मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों द्वारा जिस तरह से सरेआम मारपीट की गई है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस इस मामले का संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ धारा 151 के तहत दंडात्मक कार्रवाई करने जा रही है।
दोहरी दर्शन व्यवस्था और बार-बार बनती विवाद की स्थिति
ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए वर्तमान में दो तरह की व्यवस्थाएं लागू हैं। सशुल्क दर्शन (झूला पुल)- यहां से टिकट लेकर जल्दी और सुगम दर्शन की व्यवस्था है। निःशुल्क दर्शन (पुराना पुल)- आम श्रद्धालुओं के लिए जो बिना टिकट मुफ्त में दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें पुराने पुल के रास्ते भेजा जाता है। कई बार श्रद्धालु नियमों को समझे बिना या जानबूझकर दबाव बनाकर झूला पुल वाले वीआईपी रास्ते से ही प्रवेश करना चाहते हैं, जिसके कारण ऐसी विवाद की स्थितियां निर्मित होती हैं।
पहले भी दागदार हो चुकी है तीर्थनगरी की छवि
यह कोई पहला मौका नहीं है जब ओंकारेश्वर मंदिर के कर्मचारियों का ऐसा हिंसक चेहरा सामने आया हो। इससे पहले भी कई बार श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता और मारपीट के मामले सुर्खियां बन चुके हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर आम जनता द्वारा मंदिर की लचर और भेदभावपूर्ण अव्यवस्थाओं को लेकर आरोप लगते रहे हैं। इस ताजा घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आस्था के इन बड़े केंद्रों पर वीआईपी कल्चर और प्रबंधन की तानाशाही आम श्रद्धालुओं पर भारी पड़ रही है।



