Mossad Chief Roman Gofman Controversy Netanyahu,नेतन्याहू के वफादार के चीफ बनने से इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद में फूट, कौन हैं रोमन गोफमैन, क्या है विवाद? – israel pm netanyahu praised roman gofman as new mossad chief expressing confidence know controversy – Uae News


Mossad chief controversy: रोमन गोफमैन के नये मोसाद प्रमुख बनाए जाने से इजरायल में विवाद शुरू हो गया है। मोजूदा प्रमुख ने गोफमैन को अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने वाला आदमी बताया है। उनके ऊपर 17 साल एक किशोर को अपने मिशन के लिए मोहरा बनाने का भी आरोप है।

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इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के नये प्रमुख बने रोमन गोफमैन
तेल अवीव: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को मिलिट्री सेक्रेटरी मेजर-जनरल रोमन गोफमैन को मोसाद के अगले प्रमुख के तौर पर मंजूरी दे दी है। गोफमैन 2 जून को डेविड बार्निया की जगह देश के शीर्ष जासूसी प्रमुख का पदभार संभालेंगे। बार्निया का पांच साल का कार्यकाल इसी दिन पूरा हो रहा है। रोमन गोफमैन के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद नेतन्याहू ने उनकी तारीफ करते हुए कहा “वह (गोफमैन) एक बेहतरीन अधिकारी हैं, साहसी और रचनात्मक हैं जिन्होंने पूरे युद्ध के दौरान लीक से हटकर सोचने का नजरिया और जबरदस्त सूझबूझ का प्रदर्शन किया है।”

नेतन्याहू ने मोसाद प्रमुख के तौर पर गोफमैन को उनकी नई भूमिका में सफलता की शुभकामनाएं भी दीं और विश्वास जताया कि वह इजरायल की सुरक्षा में अहम योगदान देंगे। गोफमैन की इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ आयल जमीर ने भी तारीफ की है। उन्होंने कहा “मुझे पक्का लगता है कि उनका मिलिट्री में करियर बहुत शानदार रहा है और वे हर लिहाज से एक बेहतरीन और काबिल इंसान हैं।” जमीर ने तो यहां तक कह दिया कि अगर गोफमैन ने मोसाद के प्रमुख का पद न संभाला होता तो वे IDF के चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर उनकी खुद की जगह ले सकते थे।

गोफमैन की नियुक्ति पर मोसाद में फूट!

दूसरी तरफ मौजूदा मोसाद चीफ बार्निया ने गोफमैन की नियुक्ति का जोरदार विरोध किया और इस घोषणा के संबंध में कहा कि गोफमैन ‘ऐसा व्यक्ति है जो अपनी शक्ति का दुरुपयोग करता है।’ ओरी एल्माकायस, जिनका गोफमैन के साथ लंबे समय से सार्वजनिक विवाद चल रहा है, उन्होंने जोर देकर कहा “रोमन गोफमैन की नियुक्ति को मंजूरी देने का सीनियर अपॉइंटमेंट्स कमेटी का फैसला बेतुका है।” उन्होंने आगे कहा “रोमन गोफमैन की नियुक्ति मोसाद और इजरायल राज्य की सुरक्षा के लिए एक असली खतरा है। मैं यहीं नहीं रुकूंगा और मैं गोफमैन की नियुक्ति को रद्द करवाने के लिए लड़ूंगा।”
आपको बता दें कि एल्माकायस का मामला इजरायल में काफी विवादित है। गोफमैन पर आरोप है कि जब वे 210वीं डिवीजन के कमांडर थे तब उन्होंने 17 साल के एक किशोर (ओरी एलमकेयस) को एक अनधिकृत प्रभाव अभियान के लिए भर्ती किया था। इस दौरान उस किशोर को गोपनीय जानकारी दी गई जिसे उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। बाद में उस एल्माकायस को गिरफ्तार कर लिया गया और 18 महीने तक हिरासत में रखा गया। एल्माकायस ने दावा किया कि उस अभियान के नतीजों के बाद गोफमैन ने ‘उन्हें अकेला छोड़ दिया’ था। गोफमैन की नियुक्ति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इस घटना का जिक्र किया और कहा “जिस किसी ने भी 17 साल के लड़के को अकेला छोड़ा वह मोसाद के एजेंटों को भी अकेला छोड़ देगा।”

अभिजात शेखर आजाद

लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।

अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।

विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।

पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।

पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।

अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें