हरदेाई जिले में सुरसा थाना क्षेत्र के भीठा गांव में संदीप ने बेटे कार्तिक के मुंडन पर रामचरित मानस का अखंड पाठ घर में रखा गया था। पाठ की शुरूआत विधिवत पूजन के साथ रविवार को हुई थी। मुंडन के बाद वापस घर आने पर सोमवार को रामचरित मानस के पाठ को विश्राम दिया जाना था। अचानक हुई घटना का पता चलने पर सब कुछ थम गया। जिस माइक से रामचरित मानस की चौपाइयां गूंज रही थीं। उन्हीं माइकों पर घर की महिलाओं का करुण क्रंदन पूरे गांव को सुनाई दे गया। कार्तिक का मुंडन कराने के लिए परिजन और रिश्तेदार सोमवार सुबह लगभग 11 बजे घर से निकले थे। उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ सभी लोग गए थे।
बाबा मंदिर में पूजन के बाद मुंडन संस्कार हुआ। कार्तिक के बाल लेने के लिए उसकी बुआ कन्नौज जनपद के जलाललपुर थाना क्षेत्र के सारों थोक गांव निवासी सीमा आई थीं। उसने कार्तिक के बाल भी लिए। फिर सभी लोग ढोलक बजाते हुए ट्रैक्टर और पिकअप से वापस घर जा रहे थे। फर्दापुर में मोनी अपने भाई संतराम और भाभी संगीता की बाइक पर बेटी गौरी और भांजे (सीमा का पुत्र) बासू के साथ चली गईं। ऐसा इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें जल्दी घर पहुंचकर रामचरित मानस के अखंड पाठ का विश्राम होने पर होने वाले हवन की तैयारी करनी थी। इससे पहले ही हुई घटना में उनकी मौत हो गई।

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टक्कर मारने के बाद खंती में खड़ा मैजिक डाला
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मुंडन में शामिल होने आई थी बेटे का गंवा बैठी सीमा
कन्नौज के जलालपुर थाना क्षेत्र के सारोथोक निवासी सीमा के दो पुत्रियां जान्हवी और मानवी हैं। इकलौता पुत्र बासू था। भाई के पुत्र के मुंडन में शामिल होने सीमा अपने तीनों बच्चों के साथ आई थीं। पति दूसरे प्रदेश में मजदूरी करते हैं। सीमा हादसे में अपने इकलौते बेटे को गंवा बैठीं। उधर, दूसरी ओर दादी बुद्धमती की गोद में बैठा कार्तिक बेहद डरा हुआ नजर आया। कई बार उससे बातचीत की कोशिश परिजनों ने की लेकिन वह किसी से नहीं बोला। ज्यादा पूछने पर जोर-जोर से रोने लगता और मम्मी (मोनी) को बुलाने की जिद करने लगता।

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परिजनों से घटना की जानकारी लेते डीएम अनुनय झा व एसपी अशोक कुमार मीणा
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मासूम के शव थे बिखरे, अभी तो जिंदगी शुरू भी नहीं हुई थी
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि घटना में दो मासूम बच्चों समेत चार लोगों की मौत मौके पर ही हो गई थी। घटनास्थल पर शव बिखरे पड़े थे। नौ माह के बासू और दो साल की गौरी का शव तो ऐसे पड़ा थे, जैसे किसी ने गुड्डे गुड़िया फेंक दिए हों। दोनों ही मासूम अभी ठीक से मां-पिता के अलावा किसी को पहचाने तक नहीं सकते थे, जिसने भी बच्चों के शव देखे वह दहलकर रह गया। लोगों के मुंह से बर्बस ही निकल पड़ा कि अभी तो जिंदगी शुरू भी न हुई थी और खत्म हो गई। घटना के बाद मौके पर खून पड़ा हुआ था। शव उठाए जाने के बाद स्थानीय लोगों ने ही खून पर मिट्टी डाली। घटनास्थल के साथ ही मेडिकल कॉलेज में भी मृतकों के परिजनों को संभालना मुश्किल हो गया।

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घटनास्थल पर पड़ी बाइक
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दावत के लिए बने थे पकवान, फिर आनन फानन पसर गया सन्नाटा
संदीप मजदूरी करता है। आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक उसके पास खेती भी नहीं है। बेटे के मुंडन पर उसने बड़ी दावत का इंतजाम किया था। गांव भर के लोगों के साथ रिश्तेदारों को भी आमंत्रित किया था। इसकी वजह से पकवान बनवाने के लिए हलवाई भी रविवार से ही आ गए थे। मकान के ही एक हिस्से में हलवाई काम लगाए हुए थे। दावत में खाने के बाद मिठाई के तौर पर रसगुल्ले और मेहमानों को वापसी के समय देने के लिए लड्डू भी बन चुके थे। सब्जियां कट गई थीं, बस इनको बनाया जाना था। इसी बीच हादसे की खबर आई तो हलवाई भी सब कुछ जस का तस छोड़कर मौके से चले गए। इसके बाद फिर इस कमरे का रुख किसी ने नहीं किया और यहां सन्नाटा पसरा रहा।

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मेडिकल कॉलेज में रोते बिलखते मृतकों के परिजन
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माल वाहक वाहन में सवारी बैठाने पर तीन बार किया जा चुका था डाला का चालान
यातायात पुलिस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि दुर्घटना करने वाला डाला बिलग्राम के हूंसेपुर निवासी मनोज कुमार नागर के नाम है। माल वाहक वाहन के तौर पर इसका पंजीकरण उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में है। इस वाहन का सवारी ढोने के आरोप में तीन बार चालान किया जा चुका है। 29 जुलाई 2023, तीन मार्च 2024 और बीती 28 सितंबर यानी रविवार को ही इस मैजिक का चालान किया गया था। तीनों बार दो-दो हजार रुपये का जुर्माना इस पर किया गया था। हालांकि, घटना के समय वाहन में कोई सवारी नहीं थी।


