Government Employees Have No Right to Demand Promotion Supreme Court Delivers Major Verdict सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन मांगने का कोई अधिकार नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, India News in Hindi


Supreme Court ने कहा कि अधिकारी का पद चयन वाला पद था, न कि प्रमोशन वाला। साथ ही कहा कि चयन का तरीका एक नीतिगत मामला है, जो पूरी तरह से सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के पास पुराने सेवा नियमों के तहत पदोन्नति मांगने का कोई निहित अधिकार नहीं होता। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार किसी भी चरण में नए सेवा नियम लाकर चयन और पदोन्नति के तरीके और प्रक्रिया में बदलाव करने में सक्षम है, बशर्ते कि वे मनमाने न हों। जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ ओडिशा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी के पास न तो पदोन्नति पाने का कोई निहित अधिकार होता और न ही उसे पदोन्नति की कोई वैध अपेक्षा होती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी के सिर्फ अपनी उम्मीदवारी पर विचार किए जाने का एकमात्र सीमित अधिकार होता है। हालांकि, पीठ ने कहा कि यदि सरकार, जो कि नियुक्ति प्राधिकारी है, अपने विवेक से यह फैसला करती है कि रिक्तियों को पदोन्नति के द्वारा नहीं भरा जाएगा (विशेष रूप से तब, जब कैडर में बदलाव और पदों का पुनर्गठन हुआ हो), तो उसे नियुक्तियां करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां तक मौजूदा मामले का सवाल है तो इसमें सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का पद चयन वाला पद था, न कि प्रमोशन वाला। साथ ही कहा कि चयन का तरीका एक नीतिगत मामला है, जो पूरी तरह से सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। पीठ ने कहा कि यदि सरकार को चयन का तरीका बदलना सही लगे, तो यह उसके अधिकार, सत्ता और क्षमता के दायरे में था। जब तक यह बदली हुई नीति मनमानी साबित नहीं हो जाती, तब तक कर्मचारी उस पद पर दावा नहीं कर सकते। यह मामला ओडिशा परिवहन विभाग में कर्मचारियों के पदोन्नति से जुड़ा था।

रिहायशी क्षेत्र के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में निकाय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे रिहायशी जगहों के व्यावसायिक इस्तेमाल के दुरुपयोग की जांच करें और रिपोर्ट पेश करें। यह निर्देश अनधिकृत निर्माण और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों के उल्लंघन के एक मामले में उठाई गई चिंताओं के बाद दिए गए हैं। पीठ ने ‘लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य’ मामले में ये निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न शहरों में भवन नियमों और जमीन के इस्तेमाल के मानदंडों के कथित उल्लंघन के मामलों का जिक्र भी किया। कहा कि रिहायशी इलाकों को व्यावसायिक जोन में बदलने के कथित कदम के नागरिक और पर्यावरणीय प्रभाव हो सकते हैं।



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