एजेंसी, नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि राज्य सरकारें महंगाई भत्ता (Supreme Court DA DR Equal) बढ़ाते समय नौकरी कर रहे कर्मचारियों और पेंशनधारकों के बीच कोई भेदभाव (Pensioners DA Equal to Employees) नहीं कर सकतीं। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने केरल सरकार और KSRTC की अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि महंगाई की मार दोनों पर एक जैसी पड़ती है, इसलिए उनके हक भी एक समान होने चाहिए।
दो टूक बातें: कोर्ट ने क्या कहा?
- समानता का आधार: कोर्ट ने कहा कि वर्गीकरण तभी वैध है जब उसके पीछे कोई ठोस तर्क हो। इस मामले में पेंशनभोगियों और सेवारत कर्मचारियों के लिए अलग-अलग दरें तय करने का कोई तार्किक आधार नहीं मिला।
- महंगाई का असर: पीठ ने जोर देकर कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी न केवल पेंशन के, बल्कि ‘महंगाई राहत’ (DR) के भी हकदार हैं। चूंकि DA और DR दोनों का उद्देश्य बढ़ती कीमतों से राहत देना है, इसलिए इनकी दरों में अंतर करना भेदभावपूर्ण है।
- सरकार की जिम्मेदारी: पेंशन का लाभ कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का संवैधानिक हक है।
यह फैसला देशभर के लाखों पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब सरकारें फंड की कमी का बहाना बनाकर बुजुर्गों के महंगाई भत्ते में कटौती नहीं कर पाएंगी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि जब उद्देश्य एक ही है- महंगाई से लड़ना है तो फिर दो अलग मापदंड नहीं चलेंगे।


