नई दिल्ली. एक ही भूमिका, एक जैसे कौशल, टीम को संकट से निकालने का वही भरोसा लेकिन बीसीसीआई की कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट में रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल के बीच खींच दी गई है एक मोटी, असहज लकीर. चयन और सम्मान की इस असमानता ने बीसीसीआई की नीति पर ही नहीं, उसकी नीयत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. यह फर्क प्रदर्शन का नहीं, बल्कि सोच का लगता है और यही इस दोहरे रवैए को सबसे ज़्यादा बेनकाब करता है.
वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मैच के अलावा क्रिकेट के गलियारों में इस समय एक ही चर्चा है बीसीसीआई की नई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट. इस चर्चा के केंद्र में हैं दो बाएं हाथ के स्पिन-ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल. जहां जडेजा को ग्रेड-A (शीर्ष श्रेणी) में रखा गया है, वहीं तीनों फॉर्मेट खेलने वाले और टी20 टीम के उप-कप्तान अक्षर पटेल को सीधे ग्रेड-C में धकेल दिया गया है.
आंकड़ों की जुबानी: जडेजा बनाम अक्षर (2024-2025)
पिछले दो वर्षों के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो अक्षर पटेल का कद जडेजा के लगभग बराबर या कई मौकों पर उनसे बड़ा नजर आता है. टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जडेजा ने 2024 विश्व कप के बाद इस फॉर्मेट से संन्यास ले लिया है वहीं दूसरी ओर,अक्षर पटेल भारत के मुख्य हथियार बनकर उभरे हैं. 2025 में अक्षर ने 19 मैचों में 19.41 की औसत और 6.93 की शानदार इकोनॉमी से 17 विकेट झटके. वनडे क्रिकेट में इस प्रारूप में भी अक्षर का पलड़ा भारी दिख रहा है. अक्षर ने पिछले 11 मैचों में 290 रन बनाए और 11 विकेट लिए. जडेजा का वनडे फॉर्म चिंता का विषय रहा है उनका आखिरी अर्धशतक 2020 में आया था. टेस्ट क्रिकेट जडेजा का असली गढ़ है और वह पिछले 38 महीनों से दुनिया के नंबर-1 टेस्ट ऑलराउंडर बने हुए हैं. हालांकि, अक्षर ने भी 15 टेस्ट में 57 विकेट और 34.4 की औसत से 688 रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की है.
सवाल: क्या फॉर्मेट की उपलब्धता मायने नहीं रखती?
बीसीसीआई के नियमों के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट आमतौर पर खिलाड़ी की प्राथमिकता और फॉर्मेट में भागीदारी पर आधारित होते हैं. जडेजा अब केवल दो फॉर्मेट (टेस्ट और वनडे) के लिए उपलब्ध हैं, फिर भी वह टॉप ग्रेड में हैं. वहीं अक्षर पटेल, जो टेस्ट बैकअप होने के साथ-साथ वनडे और टी20 के नियमित सदस्य हैं, उन्हें ग्रेड-C में रखना विशेषज्ञों की समझ से परे है. आकाश चोपड़ा जैसे पूर्व क्रिकेटरों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि “अक्षर पटेल का ग्रेड-C में होना पूरी तरह अनुचित है, वह कम से कम ग्रेड-A के हकदार थे.
ये सच है कि जडेजा का अनुभव और टेस्ट रैंकिंग उन्हें बढ़त दिलाती है, लेकिन भविष्य के “थ्री-डायमेंशनल” खिलाड़ी अक्षर पटेल को ग्रेड-C में रखना उनके मनोबल पर असर डाल सकता है. क्या बीसीसीआई का सिस्टम केवल नाम और अनुभव पर चलता है, या मौजूदा फॉर्म और उपलब्धता की कोई कीमत नहीं? यह बहस लंबे समय तक जारी रहेगी.


