Mercury Planet News,सौर मंडल में हलचल, सिकुड़ रहा सूरज के सबसे पास वाला ग्रह, एक्सपर्ट ने चेताया, जानें क्या है इसका मतलब – mercury closest planet to sun has shrunk in size may be shrinking more study suggests – Science News News


वॉशिंगटन: सूरज के सबसे पास वाले ग्रह यानी बुध (Mercury) सिकुड़ रहा है। बुध पर आईं झुर्रियां बताती हैं कि यह ग्रह कभी बड़े आकार का था, जिसका साइज अब घट गया है। बुध की फटी हुई सतह पर ऐसी सिकुड़न के निशान एक्सपर्ट को मिले हैं। वैज्ञानिक इन उभारों और चट्टानी किनारों को ‘सिकुड़ने वाली संरचनाएं’ कहते हैं। कुछ चट्टानी किनारे 1 मील (1.6 किलोमीटर) तक ऊंचे हो सकते हैं और ये सैकड़ों मील तक फैले हो सकते हैं। एक्सपर्ट ने ये सिकुड़न और ज्यादा बढ़ने को लेकर चेताया है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार, हमारे सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह सूरज से औसतन 36 मिलियन मील (58 मिलियन किमी) दूर है और 88 दिनों में सूरज का चक्कर पूरा करता है। यह पथरीला ग्रह 4.5 अरब साल पहले गैस और धूल के घूमने से बना था। सौर मंडल के शुरुआती दिन उथल-पुथल भरे थे, जिनमें सूरज के चारों ओर घूमने वाली अंतरिक्ष चट्टानें दूसरी चीजों से टकराती रहती थीं।

नए बने ग्रह पहले से ही ऐसे गर्म होते हैं जैसे ज्वालामुखी का लावा लेकिन ऐसी टक्करों से निकलने वाली ऊर्जा और ज्यादा गर्मी पैदा करती है। जैसे-जैसे समय के साथ इन ग्रहों से गर्मी निकलती है, बुध जैसे ग्रहों के अंदरूनी हिस्से सिकुड़ जाते हैं।

एक्सपर्ट

क्या कहती है नई रिसर्च

जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी के अनुसार, टक्करों से निकले मलबे ने शायद यह छिपा दिया है कि समय के साथ बुध कितना सिकुड़ा है। बुध के सिकुड़ने की दर को समझने से यह पता चल सकता है कि ग्रह का विकास कैसे हुआ और इसके रहस्यमयी अंदरूनी हिस्से के बारे में राज खुल सकते हैं।
बुध जैसे-जैसे सिकुड़ा, इसकी सतह पर एक जैसे तरीके से दरारें पड़ी होंगी। जर्मन एयरोस्पेस सेंटर में प्लेनेटरी साइंटिस्ट और स्टडी के मुख्य लेखक गाकू निशियामा ने कहा कि अरबों सालों तक हुई टक्करों से बने गड्ढों और मलबे ने इनमें से कई दरारों को ढक दिया। सूरज के पास होने की वजह से अध्ययन मुश्किल रहा है।

हमारी पृथ्वी जैसे बड़े, पथरीले पिंडों के बनने और उनके विकास के बारे में ऐसे सबक हैं जिन्हें हमारे सौर मंडल में किसी भी दूसरी जगह की तुलना में बुध पर बेहतर ढंग से सीखा जा सकता है।

डॉक्टर हेन्स बर्नहार्ड्ट

कितना सिकुड़ा बुध

रिसर्च टीम ने अनुमान लगाया है कि अगर मलबा उन्हें छिपाता नहीं तो बुध की सतह पर कितनी सिलवटें हो सकती थीं। गणनाओं से पता चला कि ग्रह पहले की सोच से 10 से 30 फीसदी ज्यादा सिकुड़ा हो सकता है या इसकी रेडियस (त्रिज्या) में लगभग 7.2 मील (11.6 किलोमीटर) का बदलाव आया हो सकता है। पिछली स्टडी में रेडियस में 0.6 से 1.2 मील (1 से 2 किलोमीटर) और 4.3 मील (7 किलोमीटर) तक के बदलाव का सुझाव दिया गया था।
ग्रह कितना सिकुड़ा है, इसका हिसाब लगाने से बुध के कोर और ग्रह के ठंडे होने के दौरान उसके अंदर क्या-क्या हुआ, इस बारे में जानकारी मिल सकती है। ज्यादा सिकुड़न का मतलब हो सकता है कि बुध का मेटल कोर बड़ा हो, मेटल कोर में सिलिकॉन जैसे हल्के तत्व कम मिले हों या शुरुआत में तापमान ज्यादा रहा हो।

Science News

बुध पर रिसर्च

बेपीकोलंबो मिशन आठ साल की यात्रा के बाद बुध के पास पहुंचा है। यह इस साल के अंत में ग्रह के पास दो ऑर्बिटर तैनात करेगा। बेपीकोलंबो टीम के सदस्य निशियामा ने कहा कि मिशन टोपोग्राफी डेटा इकट्ठा करेगा। उससे वैज्ञानिक सटीकता से अंदाजा लगा पाएंगे कि बुध कितना सिकुड़ा है और ग्रह की चट्टानों, गड्ढों और उभारों को पहले ना देखी गई स्पष्टता के साथ देख पाएंगे। बेपीकोलंबो बुध की टोपोग्राफिक विशेषताओं की पहली व्यापक वैश्विक माप करेगा।

रिजवान

लेखक के बारे मेंरिजवानरिजवान नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्‍होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है।

वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्‍या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्‍टोरी और वीडियो के जरिए व‍िश्‍लेषण देना रिजवान की पहली प्राथमिकता रहती है।

पत्रकारिता अनुभव: डिजिटल मीडिया में 10 साल से कार्यरत हैं।

रिजवान ने साल 2015 में नई दिल्‍ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है।… और पढ़ें



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