राजस्थान में अपराधियों की शामत; 20 दिन में 1,624 हार्डकोर अपराधी दबोचे, Jaipur Hindi News


महज 20 दिनों में पुलिस ने 1,624 हार्डकोर अपराधियों, 1,158 नशा तस्करों और 624 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यानी अलग-अलग अपराधों में शामिल करीब तीन हजार आरोपियों को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचाया है।

जयपुर के सांगानेर में रविवार की आधी रात एक बेकाबू कार ने ऐसा कहर बरपाया कि कुछ ही मिनटों में दो परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं। 120 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से दौड़ रही कार ने एक के बाद एक तीन जगह टक्कर मारी। हादसे में 3 साल की मासूम सृष्टि और उसके पिता विष्णु समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हैं। आरोप है कि कार चालक नशे में था। पुलिस ने आरोपी चालक सूरज उर्फ संदीप को गिरफ्तार कर कार जब्त कर ली है।

सड़क पर बिखरा था खून, मां को पकड़कर बिलखता रहा चिराग

हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर वह थी, जब सड़क पर अपने पिता और छोटी बहन को खो चुका 5 साल का चिराग अपनी घायल मां श्वेता से लिपटकर फूट-फूटकर रो रहा था। उसे शायद यह समझ ही नहीं आ रहा था कि कुछ पल पहले तक उसके साथ मौजूद पिता और छोटी बहन अब कभी उठेंगे नहीं।

सड़क पर चारों तरफ चीख-पुकार थी। किसी को अपनी जान बचाने की चिंता थी तो कोई घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटा था। इसी बीच चिराग बदहवास होकर अपनी मां को पकड़कर रोता रहा। उसकी आंखों के सामने उसका परिवार बिखर चुका था।

गंभीर रूप से घायल श्वेता को अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। रिश्तेदारों ने किसी तरह चिराग को संभाला, लेकिन वह अपनी मां को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था।

बेहतर जिंदगी की तलाश में 8 महीने पहले जयपुर आया था परिवार

विष्णु करीब 8 महीने पहले गांव से जयपुर आए थे। उम्मीद थी कि शहर में मेहनत करके परिवार के लिए बेहतर जिंदगी बना पाएंगे। दुर्गापुरा में चाट का ठेला लगाकर वह अपने परिवार का पेट पाल रहे थे।

रविवार रात भी विष्णु अपनी पत्नी श्वेता, 3 साल की बेटी सृष्टि और 5 साल के बेटे चिराग के साथ बाइक से जा रहे थे। उन्हें क्या पता था कि अगले कुछ मिनट उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है।

पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पूरा परिवार सड़क पर जा गिरा। इसके बाद सामने से आ रहा एक अनियंत्रित ट्रेलर सड़क पर गिरे विष्णु और उनकी 3 साल की बेटी सृष्टि को कुचलता हुआ निकल गया।

कुछ ही पलों में पिता और बेटी की सांसें थम गईं।

जिस बेटी को विष्णु अपनी आंखों के सामने बड़ा होते देखना चाहते थे, वही बेटी उसी सड़क पर उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गई। परिवार की बेहतर जिंदगी के सपने के साथ जयपुर आए विष्णु की कहानी महज आठ महीने में ही खत्म हो गई।

मासूम ने एक साथ खो दिया पिता और बहन

चिराग की दुनिया में उस रात दो सबसे बड़े रिश्ते छिन गए। एक तरफ पिता का शव था और दूसरी तरफ उसकी छोटी बहन सृष्टि की जिंदगी खत्म हो चुकी थी। मां श्वेता भी गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाई गईं।

5 साल का यह बच्चा शायद अभी रिश्तों का पूरा मतलब भी नहीं समझता। लेकिन इतना जरूर समझ रहा था कि उसका परिवार उसके सामने टूट गया है। अस्पताल में वह बार-बार अपनी मां से चिपक जाता और रोने लगता।

उसके लिए उस रात सड़क पर सिर्फ एक हादसा नहीं हुआ था, बल्कि उसका पूरा बचपन उजड़ गया।

सांगासेतु पर भी नहीं रुकी मौत की रफ्तार

विष्णु और सृष्टि को टक्कर मारने के बाद भी कार नहीं रुकी। बेकाबू कार सांगासेतु की तरफ भागती रही। वहां उसने बाइक कैब चालक आकाश गुर्जर और उसके साथी लक्ष्य को भी टक्कर मार दी।

टक्कर लगने से दोनों सड़क पर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का एसएमएस अस्पताल में इलाज चल रहा है।

घर लौट रहे राजेन्द्र भी बन गए शिकार

इसके बाद सांगानेर थाने के सामने मोड़ पर इसी कार ने एक और बाइक को टक्कर मार दी। बाइक सवार सचिवालय नगर निवासी राजेन्द्र सिंह (43) अपनी ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे थे।

राजेन्द्र मानसरोवर स्थित शराब की दुकान पर नौकरी करते थे। देर रात काम खत्म करने के बाद वह अपने परिवार के पास लौट रहे थे। लेकिन घर पहुंचने से पहले ही मौत ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।

कार की भीषण टक्कर से राजेन्द्र गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

जिस घर में राजेन्द्र के लौटने का इंतजार हो रहा था, वहां कुछ देर बाद उनकी मौत की खबर पहुंची। परिवार के लिए यह इंतजार जिंदगी भर का दर्द बन गया।

नशे में था चालक, कार पर पहले भी कट चुके हैं चालान

पुलिस जांच में सामने आया है कि कार फरीदाबाद निवासी जगमोहन सिंह के नाम दर्ज है। कार उत्तर प्रदेश की एक ट्रैवल एजेंसी में काम करने वाला सूरज उर्फ संदीप चला रहा था। पुलिस मेडिकल जांच में उसके अत्यधिक नशे में होने की पुष्टि हुई है।

हादसे के वक्त कार में उसके दो साथी इंद्रजीत और साजन भी मौजूद थे। पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि जिस कार की रफ्तार ने तीन जिंदगियां छीन लीं, उसके खिलाफ पहले भी तेज गति से वाहन चलाने के दो चालान हो चुके थे।

एक रात, कुछ मिनट और एक बेकाबू रफ्तार ने दो परिवारों की जिंदगी बदल दी। विष्णु और सृष्टि अब कभी घर नहीं लौटेंगे। राजेन्द्र का परिवार अब उनका इंतजार नहीं करेगा। और 5 साल का चिराग शायद उम्रभर उस रात को याद करेगा, जब उसने अपने पिता और छोटी बहन को खो दिया और घायल मां से लिपटकर सिर्फ रोता रह गया।



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