सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जवल भुइयां ने कहा कि मुझे यकीन है कि चिकन बिरयानी खाना कोई जुर्म नहीं है। गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है। क्या यह ऐसी बात है, जिसके लिए उन्हें तीन महीने तक जमानत न दी जाए, मैं खुद से यह सवाल पूछता हूं।
वाराणसी में गंगा नदी के बीच इफ्तार पार्टी करने के मामले में हुई गिरफ्तारी और जल्दी जमानत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जवल भुइयां ने नाराजगी जताई है। उन्होंने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि चिकन बिरयानी खाना कोई जुर्म नहीं है। गंगा नदी पर चिकन खाने से रोकने से जुड़ा कोई कानून भीं नहीं बना है, लेकिन इसके बाद भी युवकों की गिरफ्तारी हुई और महीनों तक जेल में रहना पड़ा।
लाइव लॉ वेबसाइट के अनुसार, कार्यक्रम में जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा, ”क्या ऐसी बात के लिए जमानत नहीं दी जा सकती जो कि जुर्म भी नहीं है। मुझे यकीन है कि चिकन बिरयानी खाना कोई जुर्म नहीं है। गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है। इसी वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया था और तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा। क्या यह ऐसी बात है, जिसके लिए उन्हें तीन महीने तक जमानत न दी जाए, मैं खुद से यह सवाल पूछता हूं। लोग देख रहे हैं।”
दरअसल, इसी साल मार्च महीने में वाराणसी में गंगा नदी पर 14 युवकों पर इफ्तार पार्टी करने का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इन पर आरोप था कि इन्होंने नाव पर बैठकर इफ्तार पार्टी की और चिकन बिरयानी खाने के बाद उसकी हड्डियां नदी में फेंक दीं। इसमें 14 युवकों को काफी समय तक जेल में रहना पड़ा था और कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। इसके बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मई मध्य में युवकों को दोबारा ऐसा न करने और माफी मांगने के हलफनामे के बाद जमानत दी थी।
‘कैंपस में विरोध करने वाले छात्रों को गिरफ्तार किया जाता है’
इसके अलावा, जस्टिस भुइयां ने छात्रों छात्रों के कैंपस में प्रदर्शन करने पर होने वाली गिरफ्तारी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अपनी बात कहने का सभी को अधिकार है। वे शांति से प्रदर्शन कर सकते हैं। बहस और असहमति लोकतंत्र का सार है। लेकिन बदकिस्मती से औपचारिक कार्यों को भी अपराध की तरह बना दिया गया। कैंपस में विरोध करने वाले छात्रों को गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन्हें 30-40 दिनों तक जमानत नहीं मिलती। उन्हें सस्पेंड कर दिया जाता है और फिर कोर्ट जाना पड़ता है। बता दें कि जस्टिस भुइयां भोपाल की नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में पांचवें जस्टिस जीपी सिंह मेमोरियल लेक्चर के कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।


