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सोनम वांगचुक

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इमेज कैप्शन, सोनम वांगचुक ने कहा है कि अब अनशन को खत्म करने पर सरकार में जवाबदेही तय नहीं होगी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठे हैं.

आज उनके अनशन का 19वां दिन है. इस बीच बुधवार देर रात को उन्होंने एक संदेश जारी किया है.

सोनम वांगचुक ने कहा है कि अब अनशन को खत्म करने पर सरकार में जवाबदेही तय नहीं होगी. उन्होंने कहा कि उनकी हालत ऐसी भी नहीं है कि दो-चार दिन में उनकी मौत हो जाए.

वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में कहा, “आप लोगों के हज़ारों संदेश आए कि मैं अनशन तोड़ दूं. बड़े-बुज़ुर्ग और कई नेताओं ने मुझसे अनशन समाप्त करने के लिए कहा. कुछ ने तो अदालत से अपील की है कि सरकार मुझे ज़बरदस्ती खाना खिलाए.”

उन्होंने कहा, “दो बातें हैं, पहला तो अगर मैं खा भी लूं, तो उससे क्या बदलेगा और क्या संदेश जाएगा. सरकार को तो यही संदेश जाएगा कि जवाबदेही की ज़रूरत नहीं है, वो बैठ जाते हैं, वो चले जाते हैं.”

“दूसरी बात, मेरी हालत कुछ ऐसी भी नहीं है कि मैं दो चार दिन में मर जाऊं. बहुत सारे मेडिकल टेस्ट होते रहे हैं, 18 दिन के अनशन के हिसाब से रिज़ल्ट्स काफ़ी नॉर्मल हैं.”

सोनम वांगचुक ने कहा, “मैं अभी कई दिन चल सकता हूं. कमज़ोरी है, मेरे मसल्स ख़त्म हो रहे हैं, मगर मेरा दिल अभी भी ठीक चल रहा है. इसलिए सिर्फ अनशन तोड़ने को कहने के बजाय मैं आप लोगों से विनती करूंगा कि आप भी एक छोटा कदम उठाएं, 20 जुलाई को इतनी बड़ी संख्या में आएं कि एक संदेश सरकार को जाए.”

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा, “20 जुलाई को बहुत से सांसदों के साथ आप सब आइए. हज़ारों की संख्या में हम सब मिलकर इस मुद्दे को संसद के हवाले करेंगे, तो मुझे भी भरोसा होगा कि अब ये सही हाथों में गया है.”

गौरतलब है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ अभियान के तहत संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का आह्वान किया है.

यह पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है.



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