इस खबर का असर भी गोल्ड मार्केट पर देखने को मिला है. सोने की कीमतें सुबह 8 बजे तक एक फीसदी बढ़कर 5133 डॉलर प्रति औंस पर था, वहीं, चांदी का भाव 2 फीसदी बढ़कर 84 डॉलर प्रति औंस के करीब था. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आएगी
मार्जिन आखिर होता क्या है
कमोडिटी फ्यूचर्स में ट्रेड करते समय पूरी रकम नहीं देनी पड़ती. इसके बजाय एक निश्चित रकम जमा करनी होती है, जिसे मार्जिन कहा जाता है.
यह एक तरह की सिक्योरिटी होती है ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर नुकसान को कवर किया जा सके.
जब एक्सचेंज मार्जिन घटाता है, तो इसका मतलब होता है कि बाजार में जोखिम थोड़ा कम माना जा रहा है या ट्रेडिंग को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.
कितना घटा मार्जिन
नए फैसले के अनुसार
गोल्ड फ्यूचर्स मार्जिन करीब 22% घटाया गया
सिल्वर फ्यूचर्स मार्जिन भी लगभग 22% कम हुआ
प्लैटिनम फ्यूचर्स मार्जिन करीब 13% कम किया गया
इसका सीधा मतलब है कि ट्रेडर्स अब पहले से कम कैपिटल में ट्रेड कर सकेंगे.
बाजार में इसका क्या असर पड़ सकता है
कमोडिटी बाजार में मार्जिन कम होना एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है. जब मार्जिन घटता है तो आम तौर पर बाजार में ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ने की संभावना रहती है. क्योंकि कम पैसा लगाकर ज्यादा पोजिशन ली जा सकती है. ऐसे में कई बार गोल्ड और सिल्वर में वॉल्यूम और वोलैटिलिटी दोनों बढ़ जाती हैं.
आम निवेशक के लिए इसका मतलब
अगर कोई आम निवेशक सीधे फ्यूचर्स में ट्रेड नहीं भी करता, तब भी यह खबर महत्वपूर्ण है.क्योंकि अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर होने वाले ऐसे फैसलों का असर अक्सर:
गोल्ड और सिल्वर की कीमतों
ETF
ज्वेलरी बाजार
और घरेलू कमोडिटी ट्रेडिंग
पर भी पड़ सकता है.
एक छोटा सा उदाहरण
मान लीजिए पहले किसी गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए 10 लाख रुपये का मार्जिन देना पड़ता था.अगर मार्जिन 22% कम हो जाए तो वही कॉन्ट्रैक्ट अब लगभग 7.8 लाख रुपये में लिया जा सकता है.यानी बाजार में ज्यादा ट्रेडर्स भाग ले सकते हैं.
सवाल: आखिर हुआ क्या है?
जवाब: दुनिया के बड़े कमोडिटी एक्सचेंज CME Group ने गोल्ड, सिल्वर और प्लैटिनम फ्यूचर्स के मार्जिन में कटौती कर दी है. यह फैसला 6 मार्च 2026 के कारोबार बंद होने के बाद लागू होगा. यानी इसके बाद जो भी नया ट्रेड होगा, उसमें ट्रेडर्स को पहले से कम मार्जिन देना पड़ेगा.
सवाल: मार्जिन आखिर होता क्या है?
जवाब: फ्यूचर्स मार्केट में ट्रेड करते समय पूरी रकम नहीं देनी पड़ती. इसके बजाय एक तय रकम जमा करनी होती है, जिसे मार्जिन कहा जाता है.
इसे एक तरह की सुरक्षा राशि समझ सकते हैं. अगर बाजार में तेजी या गिरावट आती है तो उसी मार्जिन के आधार पर ट्रेड जारी रहता है.
सवाल: इस फैसले में कितना मार्जिन घटाया गया है?
जवाब: नए फैसले के मुताबिक:-गोल्ड फ्यूचर्स मार्जिन करीब 22% कम किया गया. सिल्वर फ्यूचर्स मार्जिन भी करीब 22% घटाया गया. प्लैटिनम फ्यूचर्स मार्जिन करीब 13% कम किया गया. यानी अब इन कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेड करने के लिए पहले से कम पैसे की जरूरत होगी.
सवाल: इससे ट्रेडर्स पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: मार्जिन कम होने का मतलब है कि ट्रेडर्स अब कम पूंजी लगाकर बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में पोजिशन ले सकते हैं.इससे बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि बढ़ सकती है और वॉल्यूम में तेजी देखने को मिल सकती है.
सवाल: क्या इससे सोना-चांदी की कीमतों पर असर पड़ेगा?
जवाब: आम तौर पर जब मार्जिन कम होता है तो बाजार में ज्यादा ट्रेडर्स सक्रिय हो जाते हैं. इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव यानी वोलैटिलिटी बढ़ सकती है.हालांकि कीमतों की दिशा कई अन्य फैक्टर जैसे डॉलर, ब्याज दर और भू-राजनीतिक हालात पर भी निर्भर करती है.
सवाल: आम निवेशक को इससे क्या समझना चाहिए?
जवाब: अगर कोई निवेशक सीधे फ्यूचर्स ट्रेडिंग नहीं करता, तब भी यह खबर महत्वपूर्ण है.क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मार्जिन में बदलाव का असर अक्सर गोल्ड और सिल्वर की वैश्विक कीमतों पर पड़ता है. इसका असर भारत के सर्राफा बाजार और MCX ट्रेडिंग पर भी दिखाई दे सकता है.
सवाल: एक आसान उदाहरण से समझिए
जवाब: मान लीजिए पहले किसी गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए 10 लाख रुपये का मार्जिन देना पड़ता था.अगर मार्जिन 22% कम हो गया, तो अब वही कॉन्ट्रैक्ट करीब 7.8 लाख रुपये में लिया जा सकता है.यानी ट्रेडर्स को पहले से कम पैसे में ट्रेड करने का मौका मिलेगा.
सवाल: आगे बाजार किस पर नजर रखेगा?
जवाब: अब बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि मार्जिन कटौती के बाद गोल्ड और सिल्वर में ट्रेडिंग वॉल्यूम कितना बढ़ता है.अगर वॉल्यूम बढ़ता है तो कीमतों में तेज हलचल भी देखने को मिल सकती है.


