नीदरलैंड्स, अमेरिका और अब नेपाल… T20 वर्ल्ड कप में फिसड्डी टीमें भी बन रहीं मुसीबत – Netherlands USA and now Nepal underperforming teams are becoming a problem in the T20 World Cup NTCPAS


टी20 वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों ने टूर्नामेंट की दिशा और धारणा दोनों बदल दी हैं. रविवार को वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए नेपाल बनाम इंग्लैंड मुकाबले ने यह साफ कर दिया कि इस विश्व कप में अब कोई भी टीम हल्की नहीं है.

इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवर में 184 रन बनाए. जवाब में नेपाल ने आख़िरी गेंद तक मुकाबला खींचा. जीत के लिए अंतिम गेंद पर 6 रन चाहिए थे. गेंद सैम करन के हाथ में थी और स्ट्राइक पर लोकेश बाम मौजूद थे, जबकि नॉन-स्ट्राइकर एंड पर करण केसी खड़े थे. 

सैम करन की सटीक यॉर्कर पर नेपाल बड़ा शॉट नहीं खेल सका और इंग्लैंड यह मुकाबला चार रन से जीतने में सफल रहा. हालांकि स्कोरबोर्ड पर इंग्लैंड विजेता रहा, लेकिन मैदान और क्रिकेट जगत में चर्चा नेपाल के प्रदर्शन की रही. नेपाल ने पूरे मैच में इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों जॉफ्रा आर्चर, ल्यूक वुड और स्पिनर आदिल राशिद के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाज़ी की. 

यह भी पढ़ें: ‘हमें हल्के में लेने की गलती न करें’, इंग्लैंड को चौंकाने के बाद नेपाल के कप्तान ने अन्य टीमों को दिया सख्त मैसेज

किसी टीम को हल्के में नहीं ले सकते

इस प्रदर्शन के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ‘मिनो’ और ‘एसोसिएट’ टीमों की अवधारणा पर सवाल उठने लगे हैं. नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने भी कहा है कि अब इन टैग्स को हटाने का समय आ गया है.

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 10 एसोसिएट टीमें हिस्सा ले रही हैं और नेपाल, अमेरिका और नीदरलैंड जैसी टीमों ने बड़े देशों को कड़ी चुनौती दी है. नेपाल इंग्लैंड से, यूएसए भारत से और नीदरलैंड पाकिस्तान से बेहद करीबी मुकाबले हार चुकी हैं.

इन मैचों में हार का अंतर प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि कुछ अहम मौकों पर छोड़े गए कैच और बड़े खिलाड़ियों के असाधारण प्रदर्शन रहे.

ग्रुप स्टेज बना रोमांचक

टूर्नामेंट शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि ग्रुप स्टेज औपचारिक होंगे और बड़े देश आसानी से आगे बढ़ जाएंगे. लेकिन शुरुआती मुकाबलों ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है.

नेपाल बनाम इंग्लैंड मुकाबला किसी नॉकआउट मैच से कम नहीं रहा. वहीं अमेरिका ने भारत को जीत के लिए कड़ी मेहनत करने पर मजबूर किया और नीदरलैंड ने पाकिस्तान को लगभग टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था.

यह भी पढ़ें: ‘एहसान ना भूले पाकिस्तान…’, T20 वर्ल्ड कप विवाद में UAE की एंट्री, PCB को लताड़ा

टी20 फॉर्मेट का असर

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि टी20 फॉर्मेट अंतर को कम करने वाला सबसे बड़ा कारण है. 20 ओवर के खेल में एक बल्लेबाज़ या एक गेंदबाज़ पूरे मैच का रुख बदल सकता है. फ्रेंचाइज़ी लीग्स का असर भी साफ दिख रहा है. एसोसिएट देशों के खिलाड़ी अब IPL, बिग बैश और अन्य लीग्स में नियमित रूप से खेलते हैं, जिससे वे बड़े मंच पर दबाव संभालने के आदी हो चुके हैं.

आगे क्या?

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मैचों ने यह साफ कर दिया है कि यह टूर्नामेंट सिर्फ बड़ी टीमों का दबदबा नहीं रहेगा. अब सवाल यह नहीं है कि एसोसिएट टीमें मुकाबला कर सकती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि पहली एसोसिएट टीम कब किसी बड़े टूर्नामेंट का खिताब जीतती है.

—- समाप्त —-



Source link

Scroll to Top