भारत के साथ संबंधों में ‘तनाव’, बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार का बयान


वकीलों का प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से हाई कोर्ट की स्थायी बेंच की मांग होती रही है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में बुधवार को हाई कोर्ट की स्थायी बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किए.

इसी दौरान, बाग़पत में अधिवक्ताओं ने सहारनपुर-दिल्ली हाईवे को कुछ देर के लिए जाम भी किया, जिससे यात्री परेशान नज़र आए.

हालांकि, पुलिस का कहना है कि रूट डायवर्ट कर दिया गया था जिसकी वजह से यात्रियों को कम परेशानी हुई. इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल को भी तैनात किया गया.

बाग़पत के अपर पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “वकीलों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन के दौरान हाईवे जाम किया था जिसे कुछ देर बाद खुलवा दिया गया. फिलहाल ट्रैफ़िक सामान्य है.”

अधिवक्ताओं ने ज़िला प्रशासन पर ज्ञापन ना लेने का आरोप भी लगाते हुए नारेबाज़ी की.

ज़िला बार एसोसिएशन बाग़पत के सचिव अजीत सिंह ने कहा, “हम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देने डीएम कार्यालय पहुंचे थे लेकिन ज़िलाधिकारी ने हमारा ज्ञापन नहीं लिया, जिससे अधिवक्ता आक्रोशित हो गए और नेशनल हाईवे जाम कर दिया.”

हालांकि, बाग़पत की ज़िलाधिकारी अस्मिता लाल ने इन आरोपों को ख़ारिज किया.

उन्होंने कहा, “जब अधिवक्ता कार्यालय पहुंचे मैं पहले से आए लोगों की समस्याएं सुन रही थी, दफ़्तर से बाहर निकलने में कुछ मिनट लग गए. जब मैं ज्ञापन लेने बाहर गई तब अधिवक्ता वहीं थे, लेकिन उन्होंने ज्ञापन नहीं दिया और हाईवे जाम कर दिया. इससे आम लोगों को परेशानी हुई.”

बाग़पत की ज़िलाधिकारी  अस्मिता लाल

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इमेज कैप्शन, बाग़पत की ज़िलाधिकारी अस्मिता लाल के मुताबिक़ बाद में अधिवक्ताओं से ज्ञापन ले लिया गया

प्रदर्शनकारी वकीलों का कहना है कि यह प्रदर्शन किसी व्यक्ति विशेष के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की न्यायिक अस्मिता से जुड़ा मुद्दा है. बुधवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का भी बहिष्कार किया.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता लंबे समय से हाई कोर्ट की स्थायी बेंच की मांग उठाते रहे हैं. उत्तर प्रदेश का हाई कोर्ट प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) में है और इसकी एक बेंच राजधानी लखनऊ में है.

राज्य के अलग-अलग इलाक़ों से लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए प्रयागराज और लखनऊ जाना पड़ता है.



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