Paush Amavasya 2025 Date: 18 या 19 दिसंबर कब है साल की अंतिम अमावस्या? नोट करें सही तिथि और शुभ मुहूर्त


धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह पितरों को समर्पित है। पौष महीने में पड़ने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या कहा जाता है। इसे साल की अंतिम अमावस्या भी माना जाता है, जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत अधिक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि विशेष रूप से स्नान, दान, तर्पण और पितरों की शांति के लिए बहुत शुभ मानी गई है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में इस दिन की डेट (Paush Amavasya 2025 Date) से लेकर सभी बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

paush-amavashya-1764327373852

AI Genereted

पौष अमावस्या कब है? (Paush Amavasya 2025 Kab Hai?)

वैदिक पंचांग के अनुसार, 19 दिसंबर 2025, दिन शुक्रवार को सुबह 04 बजकर 59 मिनट पर पौष अमावस्या की शुरुआत होगी। वहीं, इसका समापन 20 दिसंबर को सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए इस साल पौष अमावस्या 19 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी।

पौष अमावस्या की पूजा विधि

पवित्र नदी में स्नान

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।

तर्पण और श्राद्ध कर्म

यह दिन पितरों की आत्मा की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसे में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का ध्यान करते हुए जल में काले तिल मिलाकर उनका तर्पण करें। हो पाए, तो किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं। ऐसा करने से पितृ दोष समाप्त होता है।

दान-पुण्य

अमावस्या पर किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में इस दिन काले तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र या अनाज का दान करें। दान हमेशा किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को ही दें।

यह भी पढ़ें- Paush Amavasya 2025: पौष अमावस्या के दिन जरूर करें ये उपाय, पितृ दोष की समस्या होगी दूर

यह भी पढ़ें- Paush Amavasya 2025: पौष अमावस्या पर जरूर करें इन खास चीजों का दान, मिलेगा अपार धन-दौलत का वरदान

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।



Source link

Scroll to Top