Delhi Flood: Water From Chilla To Garhi Mandu… Life In Trouble – Amar Ujala Hindi News Live


राजधानी में चिल्ला बॉर्डर से लेकर गढ़ी मांडू तक बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी मुश्किलों में घिर गई है। हालात ये हैं कि बाढ़ के पानी से लबालब गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर गांव व यमुना खादर में रहने वाले सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। ये गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। 

अब लोगों का आशियाना पुश्ता रोड का किनारा हो गया है। चिल्ला से लेकर खजूरी खास तक टेंट दिखाई दे रहे हैं। फ्लाईओवर के निचले हिस्से के साथ ऊपर की जगहों पर भी लोगों ने डेरा डाल दिया है।

वहीं, बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि उनके पास खाने-पीने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बाढ़ आने पर आनन-फानन में बेघर होना पड़ा। साथ में जरूरत का सामान भी नहीं ला सके। बस किसी तरह जान बचाकर सड़क किनारे तक पहुंच गए। प्रशासन की तरफ से गांव खाली कराने के लिए समय पर राहत और बचाव टीमें नहीं आईं। ऐसे में कई मवेशी यमुना में डूबने से मर गए। प्रशासन की ओर से लगाए गए टेंट बारिश से राहत दिलाने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। बारिश आते ही कुछ टेंट टपकने भी लगते हैं।

नहीं मान रहे लोग : बाढ़ से प्रभावित कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें खुद की जान की नहीं बल्कि यमुना की चपेट में आ चुके सामान की परवाह है। प्रशासन की ओर से बार-बार मना करने के बावजूद वे नाव पर सवार होकर गहरे पानी में सामान ढूंढ रहे हैं। ओल्ड उत्मानपुर में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि यमुना से जितना हो सके दूर रहें लेकिन लोग सामान के पीछे पड़े हुए हैं। पुराने रेलवे ब्रिज के पास टेंट में रह रहे विजय कुमार ने बताया कि यमुना की बाढ़ ने बेघर कर दिया है। परिवार के पास कुछ भी नहीं बचा है। वहीं, ओल्ड उस्मानपुर निवासी कपिल चौधरी ने बताया कि परिवार बेघर हो गया। 

वे लोगों से मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि किसी तरह सामान मिल जाए और कुछ दिन ठीक से गुजर बसर हो जाए। गढ़ी मांडू में रहने वाले मजदूर शहजाद ने बताया कि परिवार के साथ किराए के मकान में रह रहा था। सारा सामान यमुना में डूब चुका है।

बाढ़ देखने के लिए जुट रही भीड़ : कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बाढ़ देखने के लिए आ रहे हैं। यमुना खादर, ओल्ड उस्मानपुर, गढ़ी मांडू, सोनिया विहार समेत अन्य जगहों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। लोग यमुना किनारे तस्वीर लेकर वीडियो भी बना रहे हैं। 

गढ़ी मांडू : जो समान हाथ में आया, उसे ही लेकर निकल पड़े

गढ़ी मांडू निवासी बेली ने बताया कि सुबह करीब 4.30 बजे बाहर से चिल्लाने की आवाज आई। उठकर देखा तो घर में पानी भरने लगा था, लेकिन बाहर जाकर देखा तो पड़ोस में रहने वाले नूर मोहम्मद अपना सामान निकाल रहे थे। पति और तीनों बेटियों के साथ सामान समेटना शुरू किया, जो सामान हाथ आया उसे लेकर निकल पड़े। 

गढ़ी मांडू में 22 साल से रह रहे विजय ने बताया कि बुधवार रात जागने में ही बीत गई। सुबह देखा कि बाढ़ के पानी से डूब चुका है। उन्होंने जल्दी से उठकर घर वालों के साथ बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन पानी अधिक होने की वजह से वह बाहर ही नहीं निकल पाए। इसके बाद काफी देर तक मदद की गुहार लगाई। तब गांव के लोग नाव लेकर आए। उन्हीं की मदद से वह इस भयावह बाहर निकल पाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ आई और हमारा सारा सामान बहाकर ले गई। कुछ सामान घर के अंदर ही बंद पड़ा है। संवाद

चार इंजन की सरकार विफल : आप

आप के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चार इंजन वाली भाजपा सरकार दिल्ली को राहत देने में पूरी तरह विफल रही है। शिविर पानी में डूब गए। दवाइयों का इंतजाम नहीं है। केजरीवाल सरकार में जब-जब यमुना का जलस्तर बढ़ा तो समय रहते मुनादी करवाकर कैंप लगाए गए और खानपान व दवा की व्यवस्था की गई। खुद मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर पहुंचते थे लेकिन आज भाजपा सरकार गरीबों के सिर से छत छीनकर उन्हें बाढ़ में बेसहारा छोड़ रही है। 2023 में बाढ़ के समय एलजी लगातार सड़कों पर उतरकर वीडियो बनवाते थे और मुख्यमंत्री से सवाल करते थे लेकिन इस बार वे कहीं नजर नहीं आ रहे।

राहत कैंपों में भी पानी घुसा सरकार विफल : कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भाजपा सरकार पर बाढ़ प्रबंधन में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और राजधानी डूबने की कगार पर है लेकिन सरकार के इंतजाम नाममात्र के हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगाए गए राहत कैंप भी पानी में डूबे हैं। इनमें भोजन, दवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं नदारद हैं।

कांग्रेस ने 31 अगस्त को बाढ़ की रोकथाम के संबंध में सरकार की तैयारी नाकाफी होने की चेतावनी दी थी लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे नजरअंदाज कर दिया। हजारों लोग बेहाल हैं और सरकार सिर्फ कैमरों के सामने राहत कार्य दिखाने तक सीमित है। बदरपुर खादर, गढ़ी मांडू, उस्मानपुर, जमुना बाजार, निगम बोध घाट, मोनेस्ट्री, आईएसबीटी, विश्वकर्मा कॉलोनी, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय और कालिंदी कुंज सहित कई इलाके डूब चुके हैं। भाजपा सरकार 2023 में केजरीवाल सरकार की तरह ही विफल रही है। 



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