भारत की पहली रीजनल रेल को बताया सतत परिवहन का उत्कृष्ट उदाहरण
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट (एआईटीडी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को नमो भारत कॉरिडोर का दौरा किया। इस दल में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के परिवहन विशेषज्ञ शामिल थे। एनसीआरटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें भारत की पहली रीजनल रेल परियोजना की तकनीकी व परिचालन विशेषताओं से अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने न्यू अशोक नगर से दुहाई डिपो तक नमो भारत ट्रेन से यात्रा की और इसकी तेज गति, आधुनिक डिजाइन और यात्री-केंद्रित सुविधाओं का अनुभव किया। उन्होंने मेक इन इंडिया पहल के तहत गुजरात के सावली में निर्मित ट्रेनों की गुणवत्ता की सराहना की। एनसीआरटीसी अधिकारियों ने विशेषज्ञों को परियोजना की मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन (एमएमआई) प्रणाली के बारे में बताया, जिससे नमो भारत के स्टेशन अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से सहजता से जुड़े हैं।
दौरे के दौरान विशेषज्ञों ने ट्रेन संचालन और स्टेशन प्रबंधन में महिलाओं की बड़ी भूमिका को सराहनीय बताया। दुहाई डिपो में प्रतिनिधियों ने अत्याधुनिक वर्कशॉप और ट्रेनसेट रखरखाव प्रणाली का अवलोकन किया। उन्हें बताया गया कि इस परियोजना में एलटीई बैकबोन पर यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम हाइब्रिड लेवल-3 जैसी उन्नत तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने एनसीआरटीसी द्वारा परियोजना क्रियान्वयन में अपनाई गई नवीन तकनीकों और सतत विकास के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नमो भारत परियोजना भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के लिए आधुनिक और हरित परिवहन का आदर्श मॉडल है।


