Chamoli Disaster Daughters-in-law Courage Mamta Returned To Save Her Father-in-law Got Buried Under Debris – Amar Ujala Hindi News Live



धुर्मा गांव में लापता ममता देवी ससुर को बचाने गई थी, लेकिन खुद आपदा की शिकार हो गई। वहीं दूसरी बहू ममता ने सास को तो बचा लिया, लेकिन उनकी भी जान पर बन आई थी, उसने पंखे से लटककर खुद को बचाया। दोनों अभी लापता हैं, जिनकी खोजबीन लगातार जारी है।

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धुर्मा गांव में बृहस्पतिवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे जब पानी और मलबा आने लगा तो लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित जगह पर जाने लगे। यहां गुमान सिंह का परिवार भी रहता है। उनके बड़े भाई की बहू ममता पत्नी विक्रम सिंह बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थान पर जा रही थी, तभी उसे पता चला कि ससुर गुमान सिंह अंदर हैं। वह उन्हें लेने के लिए चली गई, गांव के विजेंद्र सिंह, महावीर सिंह, राजेंद्र सिंह व अन्य लोग बच्चों को सुरक्षित जगह पर लेकर चले गए।




Chamoli disaster Daughters-in-law courage Mamta returned to save her father-in-law got buried under debris

चमोली आपदा प्रभावित
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


मलबा आ गया और पूरा मकान मलबे में दब गया

ममता देवी अंदर गई तभी भारी मलबा आ गया और पूरा मकान मलबे में दब गया। जहां ममता और ससुर गुमान सिंह दब गए। गुमान सिंह की बड़ी बहू का नाम भी ममता है। जब मकान में मलबा घुसने लगा तो वह सास को निकालने के लिए अंदर गई। सास को तो बाहर निकाल लिया लेकिन तभी भारी मलबा अंदर आ गया। वह दलदल में फंस गई। जिस पर वह पंखे को पकड़कर लटक गई। काफी देर तक लटके रहने के बाद जब पानी कुछ कम हुआ तो वह बाहर निकली।


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चमोली का धुर्मा गांव
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


बादल फटने से तबाही

बादल फटने से नंदानगर के तीन क्षेत्रों में भारी तबाही मची है। बताया जा रहा है कि बादल बिंसर पहाड़ी की चोटी के दोनों तरफ फटा जिससे पानी के सैलाब की तीन धाराएं बन गईं और सैंती लगा कुंतरी, फाली लगा कुंतरी और धुर्मा को भारी नुकसान पहुंचा है। बिंसर चोटी के बायीं तरफ जहां फाली लगा कुंतरी और सैंती लगा कुंतरी गांव स्थित हैं यहां दो धाराएं बनीं गई हैं। इन धाराओं के तेज बहाव के कारण दोनों गांवों में कई मकान मलबे में दब गए। फाली लगा कुंतरी में 20 और सैंती लगा कुंतरी में 18 परिवार रहते थे।


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चमोली आपदा
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


कांवली देवी को पेड़ ने बचाया

आपदा के समय गांव में अफरा-तफरी की स्थिति बनी हुई थी। लोग सुरक्षित जगह पर जाने के लिए दौड़ने लगे। तभी कांवली देवी पानी की चपेट में आकर बहने लगी। किस्मत अच्छी रही कि नीचे एक तिमले का पेड़ था, जिसे कांवली देवी ने पकड़ लिया और जल्दी से पेड़ पर चढ़ गईं।

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चमोली आपदा
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


 

पिता के ऊपर तीन बच्चों की जिम्मेदारी

ममता देवी के दो बेटी और एक बेटा हैं। बड़ी बेटी की उम्र 17 साल, दूसरी की 15 साल और बेटे की उम्र 10 साल है। उनके पति विक्रम सिंह होटल में काम करते हैं और इन दिनों घर आए हुए हैं। विक्रम के माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। ऐसे में अब तीनों बच्चों की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई है। हालांकि परिवार के अन्य लोग भी बच्चों की देखभाल कर रहे हैं।




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