
हड़सर में पहाड़ से गिरे पत्थरों में दफनवाहन। (फाइल फोटो)।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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टूटी-फूटी कारें अब भी मलबे में आधी दबी खड़ी हैं। हड़सर से डल झील तक का रास्ता ऐसा लगता है मानो कभी यहां से आस्था के लाखों कदमों वाली पदयात्रा गुजरी ही न हो। चारों तरफ बिखरे पत्थर, गिरा मलबा और सूना पड़ा रास्ता बता रहा है कि प्राकृतिक आपदा ने इस बार मणिमहेश यात्रा में किस तरह कहर बरपाया। नाले इतने उफान पर आए कि रास्तों को बहा ले गए। अब पानी भले ही कम हो गया हो, लेकिन नालों का दायरा नदी के बराबर दिखता है। जहां अस्थायी दुकानें और लंगर स्टॉल लगते थे, वहां अब सिर्फ चट्टानें और ढही हुई मिट्टी है।


