इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. ‘जब वी मेट’ और ‘रॉकस्टार’ जैसी कल्ट फिल्में बनाने वाले इम्तियाज इस बार दर्शकों के लिए पार्टीशन की पृष्ठभूमि पर बनी एक अनूठी प्रेम कहानी लेकर आए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला, जिसके बाद से ही इसे लेकर बज बना हुआ था. अब इम्तियाज अली ने फिल्म की मेकिंग, इसके पीछे की सोच और विभाजन के दर्द के बीच पनपी मोहब्बत को लेकर खुलकर बात की है.
क्या था फिल्म के पीछे इम्तियाज का मकसद?
हाल ही में आजतक को दिए एक खास इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अक्सर विभाजन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर फिल्में बनाने पर यह सवाल उठता है कि क्या हम पुराने जख्मों को फिर से हरा कर रहे हैं? इस पर इम्तियाज अली ने कहा, ‘फिल्म बनाने का मकसद किसी के दुखों को कुरेदना बिल्कुल नहीं है. इतिहास के उन काले पन्नों के बीच इंसानी रिश्तों और मोहब्बत की कई बेहद खूबसूरत कहानियां भी दबी हुई हैं, जिन्हें भुलाया नहीं जाना चाहिए.’
इम्तियाज के मुताबिक, अपनी सहूलियत के लिए इतिहास से आंखें मूंद लेना समझदारी नहीं है, क्योंकि जो अपनी गलतियों और इतिहास को भूल जाते हैं, वे उसे दोबारा दोहराने के लिए मजबूर होते हैं. आज भी दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी ही परिस्थितियां देखने को मिलती हैं.
जब डायरेक्टर से पूछा गया कि इस फिल्म में आप वो क्या-क्या याद कर रहे हैं जो भुला दिया गया है या जिनका बहुत कम जिक्र होता है? इस पर इम्तियाज अली ने कहा, ‘फिल्म का नाम ‘मैं वापस आऊंगा‘ सीधे तौर पर उस जज्बात को बयां करता है जो हर वो इंसान महसूस करता है जिसे जबरन अपना घर छोड़ना पड़ता है. विस्थापन (माइग्रेशन) इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है. कोई भी व्यक्ति अपनी खुशी से अपना घर-बार और मिट्टी छोड़कर नहीं जाता. जब परिस्थितियां उसे भागने पर मजबूर करती हैं, तो उसके दिल के किसी कोने में यह उम्मीद हमेशा जिंदा रहती है कि वह एक दिन अपने घर जरूर लौटेगा. भले ही हकीकत में ऐसा दोबारा न हो पाए, लेकिन वह अपने साथ उस जगह की यादें और मोहब्बत हमेशा समेटे रखता है. यह फिल्म इसी अनकहे दर्द और कनेक्शन की कहानी है.’
कैसे 2026 में इस फिल्म को बनाने का आया ख्याल?
इम्तियाज अली ने कहा, ‘इस कहानी के पीछे सालों की रिसर्च और लोगों के असल अनुभव छिपे हैं. जब मैं अपनी दूसरी फिल्मों की शूटिंग के सिलसिले में पंजाब या देश के अन्य हिस्सों में जाता था, तो उन्हें विभाजन का दंश झेलने वाले परिवारों से मिलने का मौका मिला. पंजाब और बंगाल के कई बुजुर्गों ने उन्हें अपनी आपबीती सुनाई. इन सच्ची कहानियों में कुछ ऐसी बातें थीं जो बेहद अप्रत्याशित और रोमांटिक थीं. इन मुलाकातों ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने फैसला कर लिया कि विभाजन के इस मानवीय पहलू को पर्दे पर लाना बेहद जरूरी है.’
क्या इसमें राजनीति भी दिखाई देगी?
जब देश के बंटवारे जैसी बड़ी घटना पर फिल्म बनती है, तो राजनीतिक उठापटक का आना लाजिमी है. हालांकि, इम्तियाज ने साफ किया कि ‘मैं वापस आऊंगा’ कोई राजनीतिक फिल्म नहीं है. यह पूरी तरह से एक व्यक्तिगत और मानवीय कहानी है. फिल्म का मुख्य फोकस किरदारों के आपसी रिश्तों और उनकी भावनाओं पर है. हां, पृष्ठभूमि में विभाजन का वो दौर, उस समय का तनाव और हिंसक घटनाएं बैकग्राउंड में जरूर नजर आएंगी, क्योंकि मेकर्स उस कड़वी सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ना चाहते थे.
इम्तियाज ने एक बेहद खूबसूरत उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे लोहे की भारी-भरकम रेलवे पटरी के बीच भी कहीं कोई छोटा सा फूल खिल जाता है, उनकी यह फिल्म भी विभाजन की उस भयंकर त्रासदी के बीच खिले उसी ‘मोहब्बत के फूल’ की कहानी है.
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