डबडबाती आंखें, कुछ कहने की कोशिश और माथे पर चंदन… हरीश राणा के 21 सेकंड का ये आखिरी Video – harish rana last video tearful eyes attempt to say something 21 second viral video lclg


कमरे में खामोशी और बिस्तर पर लेटे हरीश राणा की आंखें बार-बार भर आ रही थीं.  ऐसा लग रहा था जैसे हरीश कुछ कहना चाहते हों… होंठ हल्के-हल्के हिलते दिखाई देते हैं, लेकिन शब्द बाहर नहीं आ पाते. उनकी आंखें डबडबाई हुई थीं. कमरे में मौजूद लोगों की निगाहें उन्हीं पर टिकी थीं. सामने खड़ी आध्यात्मिक वेशभूषा में आईं बहनें उनसे धीरे-धीरे बात कर रही थीं. उनके माथे पर चंदन लगाया और सिर पर हाथ रखा.

गाजियाबाद के हरीश राणा का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है. यह वही हरीश राणा हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद इच्छामृत्यु की प्रक्रिया के लिए दिल्ली स्थित एम्स में शिफ्ट किया जा चुका है. पिछले 13 वर्षों से वे वेजिटेटिव स्टेट यानी कोमा जैसी अवस्था में जीवन बिता रहे थे. वीडियो को देखने वाले कई लोग इसे बेहद भावुक करने वाला बता रहे हैं. वजह है उसमें कैद कुछ पल, जो शायद हरीश राणा की जिंदगी के आखिरी घर वाले क्षणों में से एक माने जा रहे हैं.

आंखों में जैसे कोई कहानी थी

करीब 21 सेकंड के इस वीडियो में हरीश राणा बिस्तर पर लेटे दिखाई देते हैं. उनके आसपास परिवार के सदस्य और कुछ आध्यात्मिक बहनें मौजूद हैं. सबसे ज्यादा जिस चीज ने लोगों का ध्यान खींचा, वह उनकी आंखें थीं. वीडियो में कई बार ऐसा लगता है कि पलकें हल्की-हल्की झपकती हैं और चेहरा जैसे कुछ कहना चाहता हो. लोगों का कहना है कि यह दृश्य देखकर यह महसूस होता है कि शायद वे आसपास की बातों को महसूस कर रहे थे.

माथे पर चंदन और प्रार्थना

इसी दौरान ब्रह्माकुमारी से आईं बहनों में से एक उनके पास खड़ी होकर धीरे-धीरे उनसे बात करती है. वह बेहद शांत स्वर में कहती है कि सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ… पास खड़े लोग चुपचाप यह दृश्य देखते रहते हैं. इसके बाद हरीश राणा के माथे पर चंदन का तिलक लगाया जाता है. बहनें उनके लिए प्रार्थना करती हैं. कमरे में एक आध्यात्मिक और भावुक माहौल बन जाता है.

एम्स जाने से पहले का है वीडियो 

जानकारी के अनुसार यह वीडियो एम्स जाने से पहले का बताया जा रहा है. उस दिन कुछ आध्यात्मिक बहनें राणा परिवार के घर पहुंची थीं. बताया जाता है कि राणा परिवार पिछले कई वर्षों से ब्रह्माकुमारी सेंटर से जुड़ा हुआ है. कठिन समय में परिवार को आध्यात्मिक सहारा मिलता रहा. इसी क्रम में 13 मार्च 2026 को साहिबाबाद के मोहन नगर स्थित ब्रह्माकुमारी सेंटर प्रभु मिलन भवन से भी बहनें राणा परिवार के घर पहुंचीं.

13 वर्षों की लंबी सेवा

हरीश राणा की जिंदगी पिछले 13 वर्षों से पूरी तरह बदल चुकी थी. चौथी मंजिल से गिरने के बाद वह कभी खड़े नहीं हो पाए. डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था. वह कोमा जैसी स्थिति में थे. वेंटिलेटर के सहारे उनको जिंदा रखा गया था. इन वर्षों में उनके पिता अशोक राणा और मां ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उनकी देखभाल को अपनी जिम्मेदारी बना लिया था. दवाइयों से लेकर रोजमर्रा की देखभाल तक सब कुछ परिवार ही संभालता रहा.

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद नया मोड़

अब इस कहानी ने नया मोड़ तब लिया जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी. इसके बाद शनिवार को हरीश राणा को गाजियाबाद से दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया. डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे उनका लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया की जा रही है. बताया जा रहा है कि अदालत की अनुमति से निष्क्रिय इच्छामृत्यु का यह मामला देश में काफी चर्चा का विषय बन गया है.

सोसाइटी के लोग भी भावुक

राजनगर एक्सटेंशन की जिस सोसाइटी में हरीश राणा परिवार रहता है, वहां के लोग भी बेहद भावुक हैं. पड़ोसियों का कहना है कि इतने वर्षों तक परिवार ने जिस समर्पण से हरीश राणा की देखभाल की, वह अपने आप में मिसाल है. सोसाइटी के निवासी तेजस चतुर्वेदी बताते हैं कि राणा परिवार की दिनचर्या ही हरीश की सेवा के इर्द-गिर्द घूमती थी. राजनगर एक्सटेंशन एओए से जुड़े दीपाशु मित्तल का कहना है कि जब लोगों ने यह वीडियो देखा तो कई लोग भावुक हो गए.

सोशल मीडिया पर चर्चा

जैसे ही यह वीडियो सामने आया, लोगों ने इसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर शेयर करना शुरू कर दिया. कई लोगों ने लिखा कि यह वीडियो केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह परिवार के धैर्य, सेवा और संवेदना की कहानी भी है. कुछ लोगों ने उस क्षण को बेहद मार्मिक बताया जब बहन ने कहा सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ.

 

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