जंतर-मंतर पर गोली चलाने की वकालत करने वाले हिंदुत्व विचारक टीजी मोहनदास से आरएसएस ने बनाई दूरी


टीजी मोहनदास

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इमेज कैप्शन, टीजी मोहनदास पत्रिका नामक यूट्यूब चैनल चलाते हैं जिस पर उनके 2 लाख सब्सक्राइबर्स हैं

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने मंगलवार को दक्षिणपंथी राजनीतिक विश्लेषक और हिंदुत्व विचारक टीजी मोहनदास की नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट पर की गई विवादित टिप्पणियों की निंदा की है.

आरएसएस ने कहा कि ये उनके “निजी विचार” हैं और इनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए.

एक बयान में आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी केबी श्रीकुमार ने स्पष्ट किया कि मोहनदास किसी भी स्तर पर आरएसएस के पदाधिकारी नहीं हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ श्रीकुमार ने कहा, “हाल के विरोध प्रदर्शन पर टीजी मोहनदास की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं. वह किसी भी स्तर पर आरएसएस के पदाधिकारी नहीं हैं. आरएसएस उनके विचारों से सहमत नहीं है और उनकी हर संभव सबसे कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए.”

यह स्पष्टीकरण मोहनदास की टिप्पणियों के एक दिन बाद आया है. उनके ख़िलाफ़ केरल में और सोशल मीडिया पर व्यापक विरोध हुआ था.

इसके बाद सीपीआई समर्थक छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन (एआईएसएफ़) ने उनके ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

वहीं केरल सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

टीजी मोहनदास ने क्या कहा था?

अंग्रेज़ी अख़बार द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, कथित भड़काऊ भाषणों के लिए जाने जाने वाले मोहनदास ने एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो में कथित तौर पर कहा था कि अगर वो ज़िम्मेदारी संभाल रहे होते, तो प्रदर्शनकारियों को हटाने से पहले जंतर-मंतर इलाके में कर्फ्यू लगा देते.

उन्होंने कहा कि अगर तीन बार चेतावनी देने के बाद भी प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटते, तो वो उन पर गोली चलाने का आदेश दे देते.

उन्होंने कहा, “अगर मैं ज़िम्मेदारी में होता, तो जंतर-मंतर के चार वर्ग किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगा देता. मैं लोगों से तीन बार वहां से हटने के लिए कहता. इसके बाद गोली चलवा देता. लोग भाग जाते, कुछ मर जाते, कुछ बच जाते और कुछ के हाथ-पैर चले जाते. चार घंटे के भीतर स्थिति पूरी तरह शांत हो जाती.”

स्टूडेंट प्रदर्शनकारी

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इमेज कैप्शन, टीजी मोहनदास ने गोली चलाने की वकालत के अलावा महिला और रेप से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी

केरल के पुलिस प्रमुख को दी गई अपनी शिकायत में एआईएसएफ़ ने आरोप लगाया कि मोहनदास ने स्टूडेंट्स प्रदर्शनकारियों को “गोली मारकर हत्या कर देने” की बात कही थी, जो हिंसा और सामूहिक हत्या की अपील के बराबर है.

एआईएसएफ़ की शिकायत के मुताबिक़, प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स पर गोली चलाने के लिए सरकार की ताक़त के इस्तेमाल की सार्वजनिक वकालत करना एक बेहद ख़तरनाक बयान था.

शिकायत में कहा गया कि यह बयान हिंसा को बढ़ावा देता है, मानव जीवन के महत्व को कमज़ोर करता है और समाज में अशांति पैदा करने की क्षमता रखता है.

एआईएसएफ़ ने मोहनदास के ख़िलाफ़ लागू सभी क़ानूनी प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की.

साथ ही, उन टिप्पणियों को प्रसारित करने वाले यूट्यूब चैनल, वीडियो के स्रोत, डिजिटल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया मंचों पर उसके प्रसार की जांच की भी मांग की.

पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी मोहनदास की टिप्पणियों की निंदा की है और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है.

फ़ेसबुक पर एक पोस्ट में विजयन ने आरोप लगाया कि ये बयान असहमति को “ख़त्म करने” की संघ परिवार की मानसिकता को दर्शाते हैं.

उन्होंने केरल की यूडीएफ़ सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि उसने आरएसएस को ख़ुश करने के लिए पुलिस और क़ानूनी व्यवस्था को महज़ मूकदर्शक बनाकर छोड़ दिया है.

पी. विजयन

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इमेज कैप्शन, पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी मोहनदास की टिप्पणियों की निंदा की है

विवाद होने के बाद मोहनदास ने क्या कहा?

टीजी मोहनदास के बयान की चौतरफ़ा होती आलोचना के बाद उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज किया.

न्यूज़ वेबसाइट एनडीटीवी के मुताबिक़, मोहनदास ने दावा किया कि “यह विवाद फ़ेसबुक पर उन लोगों ने खड़ा किया जिन्होंने पत्रिका मलयालम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड की गई 31 मिनट की पूरी चर्चा नहीं देखी.”

उनका कहना था कि 31 मिनट के वीडियो में से सिर्फ़ एक से डेढ़ मिनट लंबी क्लिप ही शेयर की गई.

मोहनदास ने दावा किया कि मलयालम भाषा का हास्य, व्यंग्य और मुहावरेदार अभिव्यक्तियां अंग्रेज़ी में अनुवाद होने पर अपना लहजा और बारीकियां खो देती हैं, इससे व्यंग्यात्मक या ट्रोलिंग के तौर पर की गई टिप्पणियां शाब्दिक बयान जैसी प्रतीत होती हैं.

गोली चलाने वाले बयान पर उन्होंने कहा कि “उनका उद्देश्य एक काल्पनिक उदाहरण देना था, जिसमें हिंसक दंगों से निपटने के दौरान पुलिस और सिविल प्रशासन द्वारा अपनाए जाने वाले सामान्य क्रम को समझाया गया था.”

वीडियो कैप्शन, जुनैद सीजेपी और पुलिस ,जंतर-मंतर पर खाना खिलाने को लेकर क्या बोले?

राज्य सरकार का क्या है कहना

केरल की यूडीएफ़ सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

राज्य की गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने कहा कि मोहनदास का “घटिया बयान” आरएसएस की “घृणित, हिंसक और महिला-विरोधी सोच” का सबूत है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि “आरएसएस हमेशा ऐसे लोगों को संरक्षण देता आया है.” हालांकि आरएसएस का कहना है कि उनका मोहनदास से कोई संबंध नहीं है.

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कहा, “देश को नफ़रत और हिंसा की आग में झोंकना आरएसएस का इतिहास रहा है, जिसे यह देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा.”

“ऐसे हताश और नफ़रत फैलाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए.”

वीडियो कैप्शन, प्रदर्शन ख़त्म करने के एलान के बाद आधी रात को क्या दिखा

सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया

हिंदुत्व विचारक टीजी मोहनदास के बयान की सोशल मीडिया पर भी काफ़ी चर्चा है और अधिकतर लोग उनकी निंदा कर रहे हैं.

अपूर्व एम असरानी ने नामक यूज़र ने एक्स पर लिखा, “अपनी सोशल मीडिया फ़ीड पर नज़र डालिए. अगर आपके दोस्त प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे जेन-ज़ी प्रदर्शनकारियों की भाषा पर तो नाराज़गी जता रहे हैं, लेकिन एक वरिष्ठ बीजेपी नेता और आरएसएस विचारक के उस बयान पर चुप हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि वे प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स पर पुलिस से गोली चलवाने का आदेश देते, तो अब समय आ गया है कि आप अपनी टाइमलाइन को साफ़ करें.”

संजय डेका नाम के यूज़र ने एक्स पर लिखा, “आरएसएस के लंबे समय से जुड़े विचारक और बीजेपी के पूर्व इंटेलेक्चुअल सेल के संयोजक टीजी मोहनदास (केरल, लंबे समय से हिंदुत्व के समर्थक, इंजीनियर, वकील और यूट्यूबर) ने कहा कि अगर वे ज़िम्मेदारी में होते, तो जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान कर्फ्यू लगा देते.

उन्होंने कहा कि “वे तीन बार चेतावनी देते और उसके बाद गोली चलवा देते.”

“यह उस सोच का भयावह चेहरा है, जो असहमति रखने वालों को इंसान नहीं समझती, छात्रों के ख़िलाफ़ घातक बल प्रयोग का महिमामंडन करती है और यौन हिंसा को सामान्य बात की तरह पेश करती है. लोकतंत्र को ऐसे ‘बुद्धिजीवियों’ की ज़रूरत नहीं है.”

उन्होंने लिखा, “देश को जवाब चाहिए. हालांकि आरएसएस ने इस शख़्स से दूरी बना ली है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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